14. पाकिस्तान की समस्याएं - Page 393

384 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

सरकार को उन समस्त प्रांतों को अल्सटर के उन जिलों पर अधिकार प्रदान करना था जिन्हें वे अपने नियंत्रण में रख सकें।

‘वे जिले जिन्हें वे अपने नियंत्रण में रख सकें’, वाक्यांश निस्संदेह इस बात का द्योतक था कि उसमें अल्सटर का संपूर्ण प्रशासकीय भूभाग सम्मिलित हो। अल्सटर के उक्त भूभाग में जो नौ सूबे थे, उनमें से तीन पूर्ण रूप से कैथोलिक थे। इसका अर्थ उनकी अपनी इच्छा के प्रतिकूल उक्त तीनों सूबों को अनिवार्य रूप से अल्सटर के अंतर्गत लेना था। परंतु अंत में सर एडवर्ड कार्सन ने क्या किया? सर एडवर्ड कार्सन को इस बात का पता लगाने में अधिक समय नहीं लगा कि इन तीन कैथोलिक सूबों के कारण अल्सटर ऋणग्रस्त हो जाएगा और एक सच्चा नेता होने के कारण पूर्ण साहस के साथ उन्होंने घोषणा की कि अल्सटर की सुरक्षा के लिए वे अपने घाटे को कम करने का प्रस्ताव करते हैं। 18 मई, 1920 के दिन हाउस ऑफ कांमस में अपने भाषण में उन्होंने घोषित किया कि 6 सूबों से वे संतुष्ट हैं। यह भाषण जो उन्होंने उक्त संदर्भ में दिया, उद्धृत करने योग्य है। उन्होंने कहाऽ-

फ्सच्चाई यह है कि इस मामले की पूरी छानबीन करने में अनेक घंटों

और कई दिनों तक की जिज्ञासा पूरी हो जाने के बाद हम इस निष्कर्ष पर

पहुंचे हैं कि इस संसद को बेलफास्ट में सफलतापूर्वक चलाने का हमें ऐसा

अवसर नहीं मिलेगा जो डोंगल, केबेन और मोनाघन की सरकार के प्रति

उत्तरदायी हो। हमारे लिए यह बात बिल्कुल ही निरर्थक होगी कि हम यहां

आएं और झूठा साहस दिखाकर कहें कि हम ऐसा कर सकते हैं। अधिक

से अधिक क्षेत्र की इच्छा स्वाभाविक है। यह जमीन पर कब्जा करने की

प्रचलित प्रणाली है, जो देशों में भिन्न-भिन्न सरकारों के क्षेत्राधिकार को

व्यापक बनाती है। परंतु हमें ऐसी सरकार बनाने में कोई लाभ नहीं है। हम

जानते हैं कि अगर हमारे ऊपर इन तीनों सूबों का उत्तरदायित्व होगा तो

इसमें हम असफल हो जाएंगे।य्

ये शब्द बुद्धिमत्तापूर्ण और हिम्मतभरे हैं। जिस परिस्थिति में इन शब्दों को कहा गया था, वह ठीक उसी परिस्थिति के समान थी जो पंजाब और बंगाल में पाकिस्तान के सिद्धांत को लागू करके पैदा की जा सकती थी। मुस्लिम लीग और श्री जिन्ना, यदि दोनों शांतिपूर्ण पाकिस्तान के इच्छुक हैं, तो उक्त शब्दों को ध्यान में रखना नहीं

ऽ हैंसर्ड (हाउस आफ कॉमंस) 1920, खंड-129, पृ. 1315