14. पाकिस्तान की समस्याएं - Page 395

386 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

इस समस्या पर विचार करने से पहले इसके स्वरूप पर विचार करें कि कितने लोग स्थानांतरित होंगे। उनकी संख्या मालूम करने के लिए तीन बातों पर ध्यान देना पड़ेगा। सर्वप्रथम, यदि पंजाब और बंगाल की सीमाओं का पुनः निर्धारण हो और जहां तक इन दो प्रांतों का मामला है, आबादी के स्थानांतरण का प्रश्न ही नहीं उठता। दूसरा, हिंदुस्तान में रहने वाले मुसलमानों ने पाकिस्तान जाने का कोई प्रस्ताव नहीं रखा है और न ही मुस्लिम लीग इस स्थानांतरण के पक्ष में है। तीसरा, उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत, बलूचिस्तान तथा सिंध में हिंदू भी स्थानांतरण की समस्या कोई घबराहट पैदा करने वाली नहीं है। वास्तव में यह समस्या इतनी छोटी है कि इसे समस्या समझना ही नहीं चाहिए।

माना कि यह एक समस्या बन सकती है, तो भी क्या यह भयंकर समस्या होगी? अनुभव बताता है कि यह एक ऐसी समस्या नहीं है जिसका समाधान असंभव हो। ऐसी समस्या के समाधान की खोज करने के लिए यह अच्छा होगा कि हम इस बात पर विचार करें कि राजनीतिक परिवर्तनों के फलस्वरूप ऐसी कौन-कौन सी कठिनाइयां हैं जो स्थानांतरित होने पर किसी व्यक्ति के मार्ग में उत्पन्न होती हैं। निम्नलिखित अड़चनें अपने आप में स्पष्ट हैं-

(1) जनसंख्या के प्रभावी एवं निर्विध्न स्थानांतरण को संपादन करने का तंत्र। (2) स्थानांतरण के विरुद्ध सरकार की मनाही।

(3) स्थानांतरण के फलस्वरूप अन्यत्र जाने वाले परिवार की संपत्ति पर सरकार

द्वारा भारी कर लगाना।

(4) परिवार के लिए अपनी अचल संपत्ति को अपने साथ नए स्थान पर ले जाने

की संभावना का न होना।

(5) अन्यत्र रहने वाले परिवार की संपत्ति का कम मूल्यांकन करने की न्यायविरुद्ध

एवं अनुपयुक्त कार्यवाही के प्रतिरोध की कठिनाइयां।

(6) बाजार में बिक्री द्वारा संपत्ति का पूर्ण मूल्य उपलब्ध न होने पर उसकी क्षति

का भय।

(7) देशांतर गमन करने वाले परिवार को दातव्य पेंशन तथा अन्य संबंधी धन की

वसूली में कठिनाई।

(8) उस मुद्रा को निर्धारित करने की कठिनाई, जिसमें धन को अदा करना है।

यदि उक्त कठिनाइयां दूर की जा सकती हैं तो जनसंख्या के स्थानांतरण का मार्ग प्रशस्त हो जाता है।