पाकिस्तान की समस्याएं
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पहली तीन कठिनाइयां बड़ी सरलता से दूर की जा सकती है, यदि पाकिस्तान और हिंदुस्तान दोनों एक संधि की धारा के अंतर्गत निम्न प्रकार की शर्त मान लें-
फ्हिंदुस्तान और पाकिस्तान की सरकारें एक ऐसे आयोग की नियुक्ति करने
पर राजी हैं, जिसमें समान संख्या में दोनों के प्रतिनिधि हों और जिसकी
अध्यक्षता किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाये, जिसकी स्वीकृति दोनों सरकारों
से मिल चुकी हो और वह न हिंदुस्तानी हो न पाकिस्तानी।
फ्आयोग तथा इसकी अन्य समितियों के कार्य-व्यय को दोनों सरकारों
द्वारा समान अनुपात में वहन किया जायेगा।
फ्पाकिस्तान की और हिंदुस्तान की सरकारें दोनों इस रीति से अपने
उन नागरिकों को जो ऐसे प्रदेशों में रहते हैं जहां पर वे अल्पसंख्या में हैं,
देशांतर गमन की इच्छा प्रकट करने का अधिकार प्रदान करती हैं।
फ्दोनों उपर्युक्त राज्यों की सरकारें इस अधिकार के प्रयोग के मार्ग में
प्रत्येक ढंग से सरलता अपनाए जाने का वचन देती हैं और वादा करती हैं
कि देशांतर गमन की स्वतंत्रता में किसी प्रकार की बाधा व झगड़ा उत्पन्न
नहीं होने देंगी। वे समस्त कानून और नियम, जो उक्त देशांतर गमन की
स्वतंत्रता में बाधक होंगे, उन्हें निष्प्रभावी समझा जाएगा।य्
चौथी और पांचवीं कठिनाइयां, जिनका संबंध संपत्ति के स्थानांतरण से है, संधि की धारा में निम्न शर्तें रखकर सरलतापूर्वक दूर की जा सकती हैं-
फ्जो इन धाराओं के परिणामस्वरूप, देशांतर गमन के अधिकार का लाभ
उठाने का निश्चय करते हैं, उन्हें अपनी हर प्रकार की चल संपत्ति को
अपने साथ ले जाने का अधिकार प्राप्त होगा और इस पर कोई कर नहीं
लगाया जाएगा।
फ्जहां तक अचल संपत्ति का ताल्लुक है, उसका निपटारा निम्नलिखित शर्तों
के आधार पर उक्त आयोग द्वारा दिया जाएगाः
(1) देशांतर गमन करने वाले व्यक्ति की अचल संपत्ति का
मूल्यांकन करने के लिए आयोग दक्ष व्यक्तियों की एक समिति नियुक्त
करेगा। इस समिति में देशांतर करने वाले भी अपना एक प्रतिनिधि रख
सकते हैं।