पाकिस्तान की समस्याएं
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अपने मूल निवास-स्थान को बदलने के लिए किसी व्यक्ति को बाध्य करना अच्छा नहीं, जब तक कि वह स्वयं यह न चाहे अथवा जब तक राज्य की शांति को उसके वहीं पर रहने से कोई खतरा पैदा नहीं होता, अथवा जब तक स्थानांतरण उसके पक्ष में आवश्यक न हो। जो बात जरूरी है वह यह है कि वे जो इस स्थानांतरण के पक्ष में हैं, इसका संपादन बिना किसी अड़चन अथवा हानि के कर सकने के योग्य हों। अतः मेरा यह मत है कि उक्त स्थानांतरण बाध्यकारी न होकर उन लोगों के लिए ऐच्छिक होना चाहिए, जो स्वतः स्थानांतरण करने की घोषणा करते हैं।
दूसरे मुद्दे के संदर्भ में, स्पष्ट है कि अल्पसंख्यक जाति के सदस्यों को ही सरकार द्वारा सहायता प्राप्त स्थानांतरण की योजना का लाभ दिया जाना चाहिए। परंतु यह प्रतिबंध भी उन लोगों के लिए पर्याप्त नहीं होगा, जिन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलना चाहिए। यह उन कतिपय स्पष्ट परिभाषित ऐसी अल्पसंख्यक जातियों तक सीमित होना चाहिए जिनको जाति संबंधित या धार्मिक अंतरों के आधार पर उत्पीडि़त किए जाने की संभावना है।
तीसरा प्रश्न महत्वपूर्ण है और दृष्टिकोण के गंभीर अंतर को उत्पन्न करने की इसमें संभावना है। मामले के न्यायपूर्ण एवं स्पष्ट दृष्टिकोण के संदर्भ में यह कहा जा सकता है कि अनिश्चित काल तक सरकार की कीमत पर प्रवास करने की इच्छा
खुली रखने के लिए सरकार को विवश करना तर्कसंगत नहीं है। किसी व्यक्ति को यह कह देना बेजा नहीं है कि पूर्ववर्ती धाराओं में सन्निहित राज्य सहायता प्राप्त प्रवास योजना के नियमों का लाभ यदि वह उठाना चाहता है, तो उसे घोषित अवधि के अंदर प्रवास करने के लिए अपनी इच्छा प्रकट करनी चाहिए और यदि वह इस निश्चित अवधि के निकल जाने के उपरांत प्रवास करता है, तो वह ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है, परंतु उसे यह व्यय स्वयं वहन करना पड़ेगा और उसे सरकारी सहायता प्राप्त नहीं होगी। इस प्रकार सरकारी सहायता उपलब्ध करने के अधिकार को सीमित करना कोई अन्याय एवं पक्षपात नहीं है। सरकारी सहायता उक्त योजना का एक महत्वपूर्ण भाग है, क्योंकि प्रवास उन राजनीतिक परिवर्तनों के परिणामस्वरूप हो रहा है, जिन पर नागरिकों का कोई व्यक्तिगत नियंत्रण नहीं है। इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं, और जब अन्य कारणों के फलस्वरूप भी ऐसा हो रहा है, तो प्रवासी के लिए सरकारी सहायता राज्य का बंधन नहीं हो सकता। किसी राजनीतिक कारण के फलस्वरूप यदि प्रवास करना पड़ता है या किसी निजी कारण के आधार पर इसको निश्चित करने का ढंग उसे किसी निश्चित अवधि से जोड़ देता है तो यदि राजनीतिक परिवर्तन के बाद निश्चित अवधि के अंदर वह प्रवास करता है तब इसे राजनीतिक समझा जा सकता है। जब ऐसा उस अवधि के उपरांत होता है तो इसे निजी की संज्ञा