14. पाकिस्तान की समस्याएं - Page 407

398 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

विभिन्न भागों में पाकिस्तान और हिंदुस्तान के विधानमंडलों और उनकी

सरकारों द्वारा अपने-अपने क्षेत्राधिकार में किया जा सकेगा और काउंसिल

द्वारा उसके पास निधियों के समायोजन सहित ऐसे सभी कदम उठाए जाएंगे,

जो शक्तियों के हस्तांतरण के लिए आवश्यक हों।

VIII . (1) यदि संविधान लागू होने के दस वर्ष बाद, जैसा कि धारा चार-(3)

में विहित है, प्रांतीय और केंद्रीय विधानमंडलों में अनुसूचित जिलों का

प्रतिनिधित्व करने वाले मुस्लिम सदस्य बहुमत से महामहिम को यह याचिका

प्रस्तुत करते हैं कि पाकिस्तान को हिंदुस्तान से पृथक करने के लिए मतदान

करवाया जाए, तो महामहिम द्वारा मतदान कराया जाएगा।

(2) मतदाताओं से निम्नलिखित रूप में प्रश्न पूछे जाएंगेः

क. क्या आप पाकिस्तान को हिंदुस्तान से पृथक करने का समर्थन

करते हैं?

ख. क्या आप पाकिस्तान के भारत से पृथक्करण का विरोध करते

हैं?

IX . यदि मतदान का परिणाम पृथक्करण का समर्थन करता है, तो महामहिम

के लिए एक आर्डर-इन-काउंसिल द्वारा घोषणा करना विधिसम्मत होगा

कि एक निश्चित तारीख से पाकिस्तान ब्रिटिश भारत का अंग नहीं रहेगा

और काउंसिल भंग कर दी जाएगी।

X . (1) यदि धारा में उल्लिखित परिस्थितियों के अनुसार दो संविधान अस्तित्व में

आते हैं तो महामहिम के लिए एक आर्डर-इन-काउंसिल द्वारा यह घोषणा

करना विधिसम्मत होगा कि पाकिस्तान पृथक राष्ट्र नहीं बनेगा और हिंदुस्तान

का अंग बना रहेगा। परंतु पाकिस्तान के लिए पृथक संविधान लागू होने के

दस वर्ष पूरा होने से पहले ऐसा आदेश जारी नहीं किया जाएगा।

परंतु ऐसी घोषणा तब तक नहीं की जाएगी, जब तक कि पाकिस्तान

और हिंदुस्तान के विधानमंडल कारक अधिनियम (कंस्टीटयूएंट एक्ट) पारित

नहीं करते, जैसा कि धारा दस-(2) में निहित है।

(2) पाकिस्तान और हिंदुस्तान के विधानमंडल समरूप अधिनियमों

के तृतीय वाचन, जिसे इसमें इसके बाद कंस्टीट्यूएंट एक्ट कहा गया है, में

पूर्ण बहुमत से सहमति प्रदान करके काउंसिल ऑफ इंडिया के स्थान पर

संयुक्त भारत के लिए विधानमंडल स्थापित कर सकेंगे और यह निर्धारित