400 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
मेरी समझ में पाकिस्तान का मसला जब तक तय नहीं हो जाता, इससे कोई लाभ नहीं है कि भारतीय मांग करें और ब्रिटिश पार्लियामेंट ऐसा ऐक्ट बनाने को तैयार हो जाये, जिससे भारत को डोमीनियन स्टेटस या स्वतंत्रता मिले। पाकिस्तान का मसला पहले तय होना चाहिए और इसका निपटारा किसी न किसी तरफ होना चाहिए। इसलिए मैंने सुझाए हुए ऐक्ट को ‘गवर्नमेंट ऑफ इंडिया (प्रलिमिनरी प्राविजंस) ऐक्ट’ कहा है। पाकिस्तान का मसला आत्मनिर्णय का होने के कारण लोगों की इच्छाओं द्वारा तय किया जाना चाहिए। जो प्रांत पहले से ही प्रमुख रूप से मुस्लिम प्रांत हैं, मैं उनमें मुसलमानों और गैर-मुसलमानों का मतदान कराना चाहता हूं। यदि अधिकतर मुसलमान अलगाव के पक्ष में हैं और अधिकतर गैर-मुसलमान इसके विरुद्ध हैं, तो मुस्लिम बहुतायत वाले जिलों से गैर-मुस्लिम जिलों को अलग करते हुए जातीय और सांस्कृतिक आधार पर प्रांतीय सीमाएं खींचकर, जहां भी सम्भव है, क्षेत्रों को तय कर देने के कदम उठाये जाने चाहिए। इसके लिए एक सीमा आयोग जरूरी है। इसलिए इस ऐक्ट में सीमा-आयोग का सुझाव दिया गया है। यदि सीमा आयोग की रचना अंतर्राष्ट्रीय हो सके, तो बेहतर होगा।
मुसलमानों और गैर-मुसलमानों के अलग-अलग जनमत-संग्रह की योजना दो सिद्धांतों पर आधारित है, जिन्हें मैं मौलिक मानता हूँ। पहला यह है कि अल्पसंख्यक लोग बहुसंख्यक के अन्याय से अपनी रक्षार्थ संरक्षण मांग सकते हैं। वे उसे पूर्व-शर्तों के रूप में मांग सकते हैं। किंतु अंतिम नियति के बारे में निर्णय करने के बहुसंख्यक के अधिकार पर वीटो लगाने का अधिकार अल्पसंख्यकों को नहीं होता। इसलिए मैंने पाकिस्तान की स्थापना का प्रस्तावित जनमत-संग्रह मुसलमानों तक सीमित रखा है। दूसरा यह है कि एक बहुसंख्यक संप्रदाय अल्पसंख्यक जाति से अपने आदेश मनवाने का दावा नहीं कर सकता। केवल एक राजनीतिक बहुसंख्या को ही राजनीतिक अल्पसंख्यकों पर शासन करने का अधिकार दिया जा सकता है, यह सिद्धांत भारत में संशोधित हो गया है, जहां, कुछ संरक्षणों के साथ अल्पसंख्यक वर्ग को बहुसंख्यक वर्ग के अधीन रखा गया है। किंतु यह साधारण सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक महत्व के विषय की बात है। यह न कभी स्वीकार किया गया है, न स्वीकार किया जा सकता है कि एक जातीय बहुसंख्या को जातीय अल्पसंख्यकों से वैधानिक मसले पर अपने आदेशों में चलाने का अधिकार हो। इसीलिए मैने केवल गैर-मुसलमानों के लिए अलग प्रस्तावित जनमतसंग्रह सुझाया है, कि वे पाकिस्तान में जाना चाहते हैं अथवा हिंदुस्तान में आना चाहते हैं।