402 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
हो सकती है। योजना कोई अलगाव नहीं है। यह केवल न्यायिक अलगाव है। यह हिंदुओं को एक अवधि देती है। वे इसे यह दिखाने के लिए प्रयोग कर सकते हैं कि अधिकार मिलने पर न्यायपूर्वक शासन करने के लिए उन पर भरोसा किया जा सकता है। मुसलमानों को यह पाकिस्तान को आजमाने का अवसर देती है।
सर स्टफर्ड क्रिप्स के प्रस्तावों के साथ अपने प्रस्तावों की तुलना करना इष्ट प्रतीत होता है। उक्त प्रस्ताव धारावाहिक कथानक की तरह श्रेणीबद्ध रूप में दिये गये हैं। 29 मार्च, 1943 को प्रकाशित घोषणापत्र में निम्नलिखित बातें सन्निहित हैं-
महामहिम की सरकार, इसलिए निम्नलिखित प्रस्थापनाएं करती हैः
फ्(क) विरोध समाप्त होने के तुरंत बाद पग उठाये जाएंगे, जिसके फलस्वरूप
भारत में अब से आगे वर्णित ढंग में एक ऐसे निर्वाचित परिषद की रचना
की जायेगी, जिसका काम भारत में नए संविधान की रचना करना होगा।
(ख) संविधान निर्मात्री परिषद में भारतीय रियासतों से सहयोग प्राप्त
करने के लिए आगे वर्णित प्रावधान होगा।
(ग) महामहिम की सरकार इस प्रकार रचित संविधान को स्वीकार
करने पर लागू करने का दायित्व निम्न शर्त पर लेती हैः
(1) ब्रिटिश भारत के किसी भी प्रांत को, जो उक्त नवीन संविधान
स्वीकार करने को तत्पर नहीं है, मौजूदा संवैधानिक स्थिति कायम रखने
का अधिकार है और यदि वह बाद में सम्मिलित होने का निश्चय
करता है, तो इसके लिए प्रावधान किया जाएगा।
ऐसे प्रत्येक सम्मिलित न होने वाले प्रांत के लिए, यदि वह ऐसा
चाहे, महामहिम सरकार एक नवीन संविधान स्वीकृत करने के लिए तत्पर
होगी, जिसमें उसे भारत संघ के सदृश वही पूर्ण स्तर प्रदान किया जाएगा
जो यहां पर प्रस्तुत की गई प्रक्रिया के अनुसार तय होगा।य्
उक्त संघ में सम्मिलित होने अथवा उससे पृथक होने की शर्तों का ब्यौरा उनके द्वारा प्रसारित रेडियो समाचार में दिया गया थाः
फ्कि उक्त विधान निर्मात्री परिषद का ध्येय समस्त भारत अर्थात् ब्रिटिश
भारत तथा ऐसी भारतीय रियासतें, जो संघ में सम्मिलित होने का निश्चय
करती हैं, के लिए केवल एक ही संविधान बनाना रहेगा।
फ्परंतु हम इस सरल तथ्य का अनुभव करते हैं कि यदि आप उन
लोगों को, जो एक साथ रहने के विरोधी हैं, एक साथ रहने के लिए राजी