15. कौन निर्णय कर सकता है - Page 413

404 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

मेरी और सर स्टफोर्ड क्रिप्स की योजना में मुख्य अंतर बिल्कुल स्पष्ट है। सम्मिलित होने या न होने के प्रश्न का निर्णय करने के लिए, दूसरे शब्दों में जिसे यह कहा जा सकता है कि पाकिस्तान हो या नहीं, सर क्रिप्स ने एक प्रांत को निर्णयात्मक इकाई माना है। मैंने एक संप्रदाय को निर्णायक इकाई माना है। निस्संदेह सर स्टफोर्ड क्रिप्स ने गलत आधार अंगीकार किया है। प्रांत तभी एक उचित इकाई हो सकती है, जब झगड़े के प्रश्न अंतरप्रांतीय हों। उदाहरणार्थ, यदि झगड़े के प्रश्न कर या जल-वितरण इत्यादि से संबद्ध हैं, तो प्रांत को एक पूर्ण प्रांत समझा जा सकता है, अन्यथा उस प्रांत में किसी एक विशिष्ट बहुसंख्यक जाति को निर्णय करने के अधिकार की बात समझ में आती है। परंतु पाकिस्तान से संबद्ध झगड़ा एक अंतर्जातीय समस्या है और एक ही प्रांत में दो जातियों के बीच हैं। इसके अतिरिक्त, विवाद का मुद्दा यह नहीं है कि किन शर्तों पर दोनों संप्रदाय एक सामान्य राजनीतिक जीवन में एक साथ रहने के लिए राजी होंगे। झगड़ा गहनतर होता जा रहा है और यह प्रश्न उठता है कि क्या जातियां एक सामान्य राजनीतिक जीवन में पूर्ण रूप से सहयोग करने के लिए तत्पर हैं? सार रूप में, यह एक सांप्रदायिक विवाद है और जातीय मतदान द्वारा ही उसका निर्णय किया जा सकता है।

IV

अपने प्रस्तावित समाधान के मौलिक होने का दावा मैं नहीं करता हूं। वे विचार, जो इसमें अंतर्निहित हैं, तीन स्त्रोतों से लिए गए हैं। प्रथम, आयरिश ऐक्य सम्मेलन से जिसकी अध्यक्षता होरेस प्लंकेट ने की थी (दूसरे, श्री एस्क्विथ के स्वायत्त शासन संशोधन बिल से, और तीसरे, आयरलैंड सरकार के 1920 के एक्ट से। यह पता चलेगा कि पाकिस्तान की समस्या का मेरा समाधान काफी सोच-समझ का परिणाम है। क्या सह समाधान स्वीकार्य होगा? पाकिस्तान के प्रश्न पर उठे विवाद के समाधान के चार मार्ग हैं। प्रथम यह है कि ब्रिटिश सरकार को एक निर्णायक प्राधिकारी के रूप में कार्य करना चाहिए। दूसरा यह है कि हिंदू और मुसलमानों को सहमत होना चाहिए। तीसरा मार्ग यह है कि उक्त विषय को एक अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थ मंडल को सौंप दिया जाये और चौथा मार्ग यह है कि उक्त विषय के समाधान के लिए गृह युद्ध के द्वारा इसे निबटाया जाये।

यद्यपि भारत आजकल एक राजनीतिक पागलखाना है, फिर भी मैं यह आशा करता हूं कि इस देश में पर्याप्त बुद्धिमान व्यक्ति हैं, जो मामलों को गृहयुद्ध तक पहुंचने की स्वीकृति प्रदान नहीं करेंगे। निकट भविष्य में राजनीतिक नेताओं के मध्य समझौते की कोई आशा नहीं है। अखिल भारतीय कांगे्रस कमेटी ने 1942 में संपन्न