कौन निर्णय कर सकता है?
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अपने इलाहाबाद अधिवेशन में श्री जगतनारायण के प्रस्ताव’ पर निश्चय किया कि पाकिस्तान के लिए प्रस्ताव स्वीकार न किया जाये। समस्या के समाधान के लिए अन्य दो मार्ग रह गए। प्रथम, संबंधित जनता द्वारा तथा दूसरा अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता द्वारा। यह वह मार्ग है जिसका सुझाव मैंने दिया है। मैं पहला अधिक पसंद करता हूं। विभिन्न कारणों से यह तरीका मुझे सही प्रतीत होता है। झगड़े का निपटारा करने में नेताओं के असफल हो जाने पर अब भी समय है कि निर्णयार्थ इसे जनता के पास ले जाया जाये। वास्तव में यह कल्पनातीत है कि प्रदेशों के विभाजन तथा एक सरकार से दूसरी सरकार के प्रति लोगों की निष्ठा बदलने का प्रश्न राजनयिक नेताओं द्वारा किस प्रकार तय किया जा सकता है। ऐसी चीजें निस्संदेह विजेताओं द्वारा की जाती हैं, जिनकी युद्ध में विजय उन्हें अपने विजित लोगों के साथ जो चाहे करने का अधिकार प्रदान करती है। परंतु हम इस प्रकार की न्यायविरुद्ध स्थिति के अंतर्गत काम नहीं कर रहे हैं। सामान्य अवस्था में जब संवैधानिक कार्रवाई स्थगित नहीं रहती, राजनीतिक नेताओं के विचारों का वह प्रभाव नहीं हो सकता जो तानाशाहों के आज्ञा-पत्रों का होता है। यह जनतंत्र के नियम-विरुद्ध होगा। नेताओं के विचारों को कार्यसूची में रखने के योग्य समझना ही उनके विचारों को यथोचित सम्मान देना है। जनता द्वारा मामले के निर्णय की आवश्यकता न उनके द्वारा बदली जा सकती है और न टाली जा सकती है। यह स्थिति है जो सर स्टफोर्ड क्रिप्स द्वारा अपनाई गई। मुस्लिम लोगों का दृष्टिकोण यह है कि पाकिस्तान बनने दो, क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान लेने का निर्णय किया है। उक्त स्थिति का नकार क्रिप्स के प्रस्तावों द्वारा किया गया है और बिल्कुल ठीक किया गया है। क्रिप्स के प्रस्तावों द्वारा मुस्लिम लीग को इतनी ही मान्यता उपलब्ध हुई है कि उसे यह प्रस्तावित करने का अधिकार प्राप्त है कि पाकिस्तान एक प्रस्ताव के रूप में विचारणीय है। पुनः यह प्रतीत होता है कि इस बात का अनुभव नहीं किया गया कि कांगे्रस जैसी अखिल भारतीय संस्था, जो बहुसंख्यक जनता की सक्रिय स्वीकृति अपने साथ ले जाने की स्थिति में नहीं है, पाकिस्तान के प्रश्न द्वारा शीघ्र प्रभावित होने के कारण, समाधान का मार्ग दिखलाने की स्थिति में नहीं हो सकती। इससे क्या लाभ होगा, यदि श्री गांधी और श्री राजगोपालाचार्य सहमत हो जाएं अथवा अखिल भारतीय कांगे्रस कमेटी पाकिस्तान को अंगीकार करने का निश्चय कर ले, यदि इसका विरोध पंजाब अथवा बंगाल के
ऽ प्रस्ताव पाठ इस प्रकार है- फ्अखिल भारतीय कांगे्रस कमेटी का विचार है कि भारत का विभाजन करने
के लिए भारत के किसी कुलक राज्य या क्षेत्र को अलग होने की स्वतंत्रता प्रदान करने वाला कोई
प्रस्ताव राज्यों और प्रांतों के लोगों तथा पूरे देश के लिए अहितकर होगा और इसलिए कांगे्रस ऐसे किसी
प्रस्ताव से सहमत नहीं हो सकती है।