408 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
लेने को तैयार नहीं थे और उन्होंने होम रूल का विरोध करने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए। वे अपने साधनों और तरीकों का चयन करने में सदैव ही ईमानदार नहीं होते थे और इसके बहाने कि वे उस सरकार के विरुद्ध लड़ रहे हैं जो राजा के प्रति वफादार रहने से उन्हें रोकती है, इसके लिए शर्मनाक तरीके अपना लेते थे। एक मैजीनट लाइन थी, जिस पर अलस्टरमैन ने होम रूल को असफल करने के लिए सदैव निर्भर किया, और वह थी हाउस ऑफ लार्डस। परंतु पार्लियामेंट एक्ट 1911 के द्वारा हाउस आरुफ लार्डस एक ऐसी दीवार बन गयी, जो न तो अधिक मजबूत थी और न ही अधिक ऊंची। इस पर सुरक्षा का भरोसा नहीं किया जा सकता था। उन्हें अपनी सुरक्षा सेना में दिखाई दी। योजना दोहरी नीति अपनाने की थी। पहली योजना यह थी कि हाऊस ऑफ लार्डस में एनवल आर्मी एक्ट को तब तक रुकवाया जाए जब तक यह सुनिश्चित न हो जाए कि अलस्टर के विरुद्ध इस्तेमाल के लिए कोई सेना नहीं होगी। दूसरी योजना यह थी कि सेना में इस बात का प्रचार किया जाए कि ‘होम रूल’ एक तानाशाही कानून है। यह इस दृष्टि से किया जाना था कि यदि आयरलैंड में सेना की सहायता से जबर्दस्ती होम रूल लागू किया जाता है, तो सेना सरकार की अवज्ञा कर सके। प्रथम योजना इसलिए अनावश्यक हो गई, चूंकि दूसरी योजना में वह सफल हो गए। यह बात मार्च, 1914 में स्पष्ट हो गई, जब कुर्राघ घटना घटी। सरकार को संदेह था कि आयरलैंड स्थित सेना के कुछ डिपुओं को यूनियनिस्ट कार्यकर्ताओं द्वारा लूटा जा सकता है। 20 मार्च 1914 को आयरलैंड में सेनाओं के कमांडर-इन-चीफ सर आर्थर पैगट को सरकार ने आदेश दिया कि डिपुओं की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाएं। इसके उत्तर में उन्होंने टेलीग्राम भेजा कि अफसर हुक्म मानने को तैयार नहीं हैं और वे अपने पदों से इस्तीफा दे रहे हैं। जनरल सर हवर्ट गफ ने अलस्टर यूनियनिस्टों के विरुद्ध कार्यवाही करने से इन्कार कर दिया और दूसरे भी उनका अनुसरण करने लगे। सरकार ने महसूस किया कि सेना का राजनीतिकरण हो गया हैंऽ इस सिद्धांत का अनुसरण करते हुए कि बहादुरी दिखाने की बजाय विवेक से काम लिया जाए, विभाजन का निर्णय लिया। एसक्विथ को सेना के विद्रोह के भय के कारण स्थिति बदलनी पड़ी। इतना अधिक भय था कि इसके बाद सेना को चुनौती देने तथा विभाजन के बिना होम रूल लागू करने की किसी की हिम्मत नहीं हुई।
ऽ इस मुद्दे पर मेजर जनरल सर सी.ई. कालवेल द्वारा लिखित लाईफ ऑफ फील्ड मार्शल सर हेनरी विल्सन,
खंड- I, अध्याय-1 और अल्सटर तथा सेना पर संसदीय वाद-विवाद (हाऊस ऑफ लॉर्ड्स, 1914,
खंड-15, पृष्ट 998-1017) देखें। इससे पता चलता है कि कुर्राघ घटना से पहले ही अलस्टरों ने सेना
को अपने साथ मिला लिया था। यह संभव है कि श्री एसक्विथ ने 1913 में एक संशोधन विधेयक
लाकर अलस्टरों को छह वर्ष के लिए होम रूल की परिधि से बाहर रखने का निर्णय कर लिया था,
चूंकि यह स्पष्ट हो चुका था कि सेना अलस्टरों के साथ है और वहां होम रूल लागू नहीं किया जा
सकता।