410 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
एक और बात, जो मैं कहना चाहूँगा। यह मुस्लिम लीग के हित में नही होगा कि वह अपने लक्ष्य की पूर्ति के लिए महामहिम की सरकार को रिझाए और भारत का विभाजन करा ले। मेरे मत से पाकिस्तान की प्राप्ति से अधिक महत्व पाकिस्तान की सिद्धि के लिए अपनाए जाने वाले तरीके का है-यदि लक्ष्य यह है कि बंटवारे के बाद पाकिस्तान और हिंदुस्तान दो भिन्न राज्य बनकर सद्भावनापूर्वक रहें और किसी को किसी के प्रति कोई दुर्भावना न रहे।
इस लक्ष्य की सिद्धि के लिए सर्वाधिक अनुकूल तरीका क्या है? हर व्यक्ति इससे सहमत होगा कि यह तरीका ऐसा होना चाहिए कि इसमें एक जाति की विजय और दूसरी को नीचा देखना निहित न हो। तरीका शांतिपूर्ण होना चाहिए, जिसमें दोनों पक्षों का आदर हो। मैं नहीं समझता कि लोगों की मतगणना से बढ़ कर कोई तरीका इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हो सकता है। सर्वोत्तम मार्ग के बारे में अपनी राय मैंने दे दी है। दूसरे लोग भी अपनी सर्वोत्तम राय ही देंगे। किंतु चाहे जो भी राय हो, जब तक समाधान में सद्विचार और उत्तरदायित्व की भावना का समावेश नहीं होगा, तब तक इस समस्या का समाधान पका हुआ फोड़ा ही बना रहेगा।