15. कौन निर्णय कर सकता है - Page 425

416 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

मालूम हुआ कि सब कुछ समाप्त हो चुका है। अब अपनी पुनर्प्रतिष्ठा और देश की एकमात्र प्रधान संस्था कांगे्रस की प्रतिष्ठा के लिए, जो ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन के फलस्वरूप जा चुकी थी और जिसके फलस्वरूप हिंसात्मक वातावरण उत्पन्न हो गया था, महात्मा गांधी ने वाइसराय से बातचीत शुरू कर दी। इस प्रयास से हारकर श्री गांधी श्री जिन्ना की ओर मुड़े। 17 जुलाई, 1944 को श्री गांधी ने श्री जिन्ना को एक पत्र लिखकर उनसे मिलने और उनके साथ सांप्रदायिक सवाल पर चर्चा करने की इच्छा प्रकट की। श्री जिन्ना ने गांधी जी को बंबई में अपने निवास स्थान पर मिलने का निमंत्रण दिया। वे दोनों 9 सितंबर, 1944 को मिले। यह अच्छा हुआ कि अंततोगत्वा गांधीजी को समझ आई और वे उस रोशनी के अवलोकन के लिए राजी हो गए, जो उनकी ओर टकटकी लगाए देख रही थी और जिस पर निगाह डालने से उन्होंने अभी तक इंकार किया था।

उनकी बातचीत का आधार श्री राजगोपालाचार्य का श्री जिन्ना को प्रस्तुत वह सूत्र था जो सी.आर. सूत्र के नाम से जाना जाता है। श्री जिन्ना के अनुसार, अपै्रल 1944 में श्री राजगोपालाचार्य और गांधीजी की बातचीत उस समय हुई जब श्री गांधी जेल में अनशन कर रहे थे और उस सूत्र का पूर्ण समर्थन गांधीजी ने किया था। श्री राजगोपालाचार्य का सूत्र या फार्मूला इस प्रकार है-

(1) स्वतंत्र भारत के संविधान के संबंध में निम्नांकित प्रस्तुत शर्तों

के अधीन, मुस्लिम लीग भारत की स्वतंत्रता की मांग का समर्थन करती

है और परिवर्तन की अवधि तक अस्थाई अंतरिम सरकार की रचना करने

में कांगे्रस के साथ सहयोग करेगी।

(2) युद्ध की समाप्ति के बाद भारत के उत्तर-पश्चिम और पूर्वी

क्षेत्र में एक दूसरे से जुड़े हुए उन जिलों का सीमांकरन करने के लिए

जिनमें मुस्लिम जनसंख्या का पूर्ण बाहुल्य है, एक आयोग की स्थापना की

जाएगी। इस प्रकार सीमांकित क्षेत्रों में वयस्क मताधिकार अथवा व्यवहार्य

मत-प्रणाली के आधार पर संपन्न समस्त निवासियों का मतदान अंततोगत्वा

हिंदुस्तान के विभाजन का प्रश्न हल करेगा। यदि बहुमत हिंदुस्तान से पृथक

एक प्रभुतासंपन्न राज्य की स्थापना का निर्णय करता है, तो उक्त निर्णय

का कार्यान्वयन, सीमाई जिलों को दोनों में से किसी राज्य को चुनने का

अधिकार दिए जाने की शर्त के साथ कर दिया जाएगा।

(3) मतदान होने के पूर्व सब दलों को अपने-अपने दृष्टिकोणों की

वकालत करने की स्वतंत्रता होगी।