उपसंहार
निम्नलिखित आश्वासन दिए जाने चाहिए-
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(1) कि उन्हें सांप्रदायिक समझौते से कोई वास्ता नहीं है। इसे समझौते अथवा मध्यस्थ बोर्ड पर छोड़ दिया जाएगा।
(2) कि भारत सरकार अधिनियम में उपबंध करने के लिए उक्त बोर्ड द्वारा प्रदत्त सांप्रदायिक प्रश्न के निर्णय को कार्यान्वित किया जाएगा।
(3) कि अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थ मंडल के निर्णय को भारत में अल्पसंख्यकों के प्रति उनके कर्तव्य-निर्वहन का पर्याप्त कारण माना जाएगा और ब्रिटिश सरकार भारत को डोमेनियम का दर्जा देगी।
इस प्रकार की प्रक्रिया के अनेक लाभ हैं। इसके द्वारा सांप्रदायिक निर्णय में ब्रिटिश हस्तक्षेप के भय का उन्मूलन हो जाता है, जिसके विषय में कांगे्रस द्वारा अनेक बार यह शिकायत की गई है कि उनके हस्तक्षेप के फलस्वरूप सांप्रदायिक मसलों पर निर्णय नहीं हो पाता। यह कहा गया है कि कांगे्रस अल्पसंख्यकों के लिए जो कुछ चाहती है, उसकी अपेक्षा ब्रिटिश सरकार से अल्पसंख्यकों को अधिक प्राप्त होगा, अतः कांगे्रस से उनकी पटरी नहीं बैठती। उक्त प्रस्ताव में दूसरा लाभ है कि यह कांगे्रस की उस आपत्ति को रद्द कर देता है कि संविधान को अल्पसंख्यकों की स्वीकृति के लिए अनिवार्य करने से अल्पसंख्यकों के हाथों में भारत की संवैधानिक उन्नति पर रोक लग जाएगी। यह शिकायत की गई है कि अल्पसंख्यक अपनी स्वीकृति रोक सकते हैं अथवा ब्रिटिश सरकार द्वारा उनकी स्वीकृति को रुकवाने के लिए उन्हें बहकाया जा सकता है, क्योंकि उन्हें इस बात की शंका है कि अल्पसंख्यक ब्रिटिश सरकार के हाथ की कठपुतली है। इस संदर्भ में, अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता, शिकायत के इस आधार को पूरी तरह हटा देती है। अल्पसंख्यकों की ओर से इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। यदि उनकी मांगें स्पष्ट एवं न्यायोचित हैं तो किसी भी अल्पसंख्यक जाति को उक्त अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थ मंडल से डरने की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती। मध्यस्थ के सामने अपने आप को समर्पित करने की आवश्यकता में कुछ भी न्याय-विरुद्ध एवं असंगत नहीं है। यह उस सामान्य कानून का अनुसरण करता है कि किसी भी व्यक्ति को अपने मामले में स्वयं न्यायाधीश बनने की आशा नहीं करनी चाहिए। अल्पसंख्यकों के मामले में भी इसके अपवाद की गुंजाइश नहीं है। एक व्यक्ति की ही भांति वे अपने मामले में न्यायाधीश बनने का दावा नहीं कर सकते। ब्रिटिश सरकार के विषय में क्या? मुझे इसमें कोई कारण नजर नहीं आता कि इस योजना के किसी भाग पर ब्रिटिश सरकार द्वारा कोई आपत्ति उठाई जाएगी।