परिशिष्ट - Page 447

438 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

संप्रदाय के दावे

देश के विभिन्न भागों में महत्त्वपूर्ण संप्रदायों के प्रभावशाली सदस्यों से परामर्श करने का गोपनीय और विनम्र उपाय आरंभ किया गया। फिर मान्यताप्राप्त राजनीतिक अथवा वाणिज्यिक संगठनों द्वारा महत्त्व के उपायों पर प्राधिकारियों को अपनी आलोचना और विचार प्रकट करने के अधिकार का मान्यता देकर अंत में नगरपालिकाओं, जिला बोर्डों और सबसे ऊपर देश के सभी विधान-मंडलों में उनका नामांकन और चुनाव कराकर इस सिद्धांत का धीरे-धीरे प्रसार किया गया। हम समझते हैं कि इस अंतिम भाग पर आपके द्वारा नियुक्त एक समिति द्वारा विचार किया जाएगा, ताकि इसका और प्रसार किया जा सके और जन-प्रचार-प्रसारित ऐसे प्रतिनिधित्व और हमारे संप्रदाय के हितों को प्रभावित करने वाले कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण मामलों में हमारे उचित हिस्से के दावे के संदर्भ में इस अवसर पर हमने आपसे बातचीत करने का साहस जुटाया है।

पिछली परंपराएं

वर्ष 1901 की जनगणना के अनुसार भारत के मुस्लिमों की संख्या 6 करोड़ 20 लाख से अधिक अथवा महामहिम के शासनाधीन भारत की कुल जनसंख्या के पांचवें और चौथे भाग के बीच थी और यदि जड़ात्मवादी शीर्षों के अंतर्गत गिनाए गए असभ्य भाग, छोटे-छोटे अन्य धर्मों और उनको जिन्हें सामान्यतः हिन्दू के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और जो वस्तुतः हिन्दू नहीं हैं, को निकाल दिया जाए तो मुसलमानों का अनुपात हिन्दुओं के बहुमत से अधिक बन जाता है। इसलिए हम यह विनम्र निवेदन करना चाहते हैं कि किसी बड़े या सीमित प्रतिनिधित्व वाली प्रणाली के अंतर्गत, कोई संप्रदाय, जो स्वयं रूस को छोड़कर किसी प्रथम श्रेणी यूरोपीयन शक्ति की संपूर्ण जनसंख्या से संख्या में अधिक हो, राज्य में एक महत्त्वपूर्ण तत्व के रूप में समुचित मान्यता का न्यायसंगत दावा प्रस्तुत कर सकता है।

वस्तुतः महामहिम की अनुमति से हम यह भी आग्रह करते हैं कि किसी भी प्रकार के प्रत्यक्ष का अप्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व और उनकी सामाजिक स्थिति तथा हैसियत को अन्यथा प्रभावित करने वाले के प्रतिनिधित्व में मुस्लिमों को दिया जाने वाला दर्जा न केवल उनकी संख्या के अनुरूप हो, बल्कि उनके राजनीतिक महत्व और साम्राज्य की रक्षा के लिए किए गए उनके योगदान के भी अनुरूप हो, और हम यह भी आशा करते हैं कि महामहिम इस संबंध में भारत में उनकी सौ से भी अधिक वर्षों की स्थिति, जिसकी परंपराएं उनकी स्मृति से मिटी नहीं होंगी, पर अपेक्षित ध्यान देंगे।