परिशिष्ट - Page 449

440 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

जिनकी इच्छा पर ही उनका भविष्य में पुनः चुना जाना निर्भर करता है। यह सच है कि अपने हिन्दू देशवासियों के साथ हमारे अनेक और महत्त्वपूर्ण समान हित हैं और यह सुनिश्चित करना हमारे सदैव संतोष का विषय रहेगा कि विधायी चैम्बरों में योग्य समर्थकों की उपस्थिति हो तथा उनकी राष्ट्रीयता को दृष्टिगत किए बिना हमारे इन हितों की सुरक्षा होती रहे।

एक पृथक संप्रदाय

फिर भी इससे इंकार नहीं किया जा सकता है कि हम मुसलमान, अपने अतिरिक्त हितों, जिसमें अन्य समुदायों का कोई हिस्सा नहीं है, के साथ एक पृथक संप्रदाय हैं और हमें अब तक इस तथ्य से हानि हुई है कि हमें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। यहां तक कि उन प्रांतों मेंµ जहां मुसलमान जनसंख्या स्पष्ट बहुमत में हैं और जिनसे प्रायः ऐसे व्यवहार किया जाता है कि वे ऐसे गैर-महत्त्वपूर्ण छोटे-छोटे राजनीतिक घटक हैं, जिन्हें बिना किसी भेदभाव के उपेक्षित किया जा सकता है।

प्रतिनिधियों के निर्वाचन के संबंध में हमारे विचार बनने के पहले हम इस बात को ध्यान में रखने का आग्रह करते हैं कि किसी सम्प्रदाय का राजनीतिक महत्व उसके सदस्यों की राज्य की सेवा में धारित स्थिति के अनुसार शक्ति प्राप्त करता है या हानि उठाता है। जैसा कि मुसलमानों के मामले में दुर्भाग्यपूर्ण है, यदि इस प्रकार उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता है, तो वे अपनी प्रतिष्ठा और प्रभाव खो देंगे जो उनका युक्तिसंगत अधिकार है।

सरकारी सेवाओं में रोजगार

अतः हम अनुरोध करते हैं कि सरकार सहर्ष ऐसा उपलब्ध करेगी कि सभी भारतीय प्रांतों की राजपत्रित और अधीनस्थ तथा मंत्रालयीन दोनों सेवाओं में एक निश्चित अनुपात में मुसलमानों को हमेशा नियुक्त किया जाएगा। अनेक बार कुछ प्रांतों की स्थानीय सरकारों द्वारा बाहर से मुस्लिम उम्मीदवारों को लेने-जैसे आदेश किए गए, परन्तु दुर्भाग्यवश सभी मामलों में इन आदेशों का ‘योग्य मुसलमान उपलब्ध नहीं हैं’ के आधार पर कड़ाई से पालन नहीं किया गया। यह आरोप, हम मानते है कि कभी ऐसा रहा होगा, परन्तु हमारा निवेदन है कि अब ऐसा नहीं है और उनको नियुक्त करने की इच्छाशक्ति ही नहीं है। हम सहर्ष आपको आश्वासन देते हैं कि अब वे मांग के अनुरूप उपलब्ध हैं।

प्रतिस्पर्धी घटक

यद्यपि योग्य मुसलमानों की संख्या में वृद्धि हुई है, परन्तु दुर्भाग्यवश उन्हें इस आधार पर रद्द करने की प्रवृत्ति बन गई है कि उच्च योग्यता को प्राथमिकता दी जानी