3. अधःपतन से मुक्ति - Page 45

36 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

थे। जिस समय ह्वेनसांग अपनी तीर्थयात्रा पर आए तब भारत की उत्तरी सीमा का उपरोक्त विस्तार था। परंतु जैसा कि प्रोफेसर टोयनबी का कथन है-

फ्हमें ‘ऐतिहासिक भावना’ के मामले में सतर्क रहना चाहिए, अर्थात्

उन स्थितियों को लेकर जो कभी विद्यमान थीं अथवा जिनके होने की

कल्पना की जाती है, परंतु जो इस समय वास्तविकता नहीं रह गई है।

उन्हें अत्यंतिक उदाहरणों द्वारा तो बड़ी आसानी से प्रस्तुत किया जा सकता

है। इतालवी अखबारों ने त्रिमोली पर अधिकार को पितृभूमि को पुनः ले

लेने की संज्ञा दी है, क्योंकि यह क्षेत्र कभी रोमन साम्राज्य का एक प्रांत

था, और मकदूनिया के सम्पूर्ण क्षेत्र पर एक ओर यूनानी संकीर्णतावादियों

का दावा रहा है, क्योंकि इसमें पेल्ला का स्थान भी है जो ईसा पूर्व चतुर्थ

शताब्दी में सिकंदर महान की स्थली था, और दूसरी ओर बलगेरियनों

का दावा है, क्योंकि ठीक दूसरी ओर के कोने में ओचरिदा स्थित है, जो

दसवीं शताब्दी में बलगेरियाई जारशाही की राजधानी रहा, हालांकि समय

के प्रवाह ने परवर्ती परंपरा को उतना ही गहरे दफना दिया है जितना कि

‘इमाथियन विजेता’ की उपलब्धियों को, जिन पर यूनानी राष्ट्रवादी इतना

दृढ़ आग्रह करते हैं।य्

यही तर्क यहां भी लागू होता है। यहां भी कभी विद्यमान रही उन स्थितियों के आधार पर तर्क प्रस्तुत किए जाते हैं जो अब वास्तविकता नहीं रह गई हैं और जिनमें बाद के उन तथ्यों पर ध्यान नहीं दिया जाता जिन्हें इतिहास ने ह्वेनसांग के वापस लौटने के बाद के वस्तुतः एक हजार वर्षों के दौरान प्रस्तुत किया है।

यह सत्य है कि जब ह्वेनसांग आए थे तो न सिर्फ पंजाब, अपितु आज का अफगानिस्तान भी भारत का भाग था और इसके अलावा पंजाब और अफगानिस्तान के निवासी वैदिक अथवा बौद्ध धर्म के अनुयायी थे। परंतु ह्वेनसांग के भारत से लौटने के बाद से क्या हुआ?

सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि पश्चिमोत्तर से भारत पर मुस्लिम आक्राताओं ने हमला किया। भारत पर पहला मुस्लिम आक्रमण अरबों ने किया, जिसका नेतृत्व मुहम्मद बिन कासिम ने किया था। यह हमला सन् 711 में हुआ था और उसने सिंध पर विजय प्राप्त की। इस पहले मुस्लिम आक्रमण का परिणाम देश पर स्थाई अधिकार के रूप में सामने नहीं आया, क्योंकि बगदाद के खलीफा को, जिसके आदेश और आह्वान पर यह हमला हुआ था, नौंवी शताब्दी के मध्य में सिंध के इस सुदूर प्रांत से अपना प्रत्यक्ष नियंत्रण हटानेऽ पर बाध्य होना पड़ा था। इसके बाद

ऽसिंध पर मुहम्मद गोरी ने पुनः अधिकार कर लिया था।