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परिशिष्ट 443

वायसराय परिषद

शाही विधायी परिषद् के संबंध में जहां मुसलमानों के हितों का समुचित प्रतिनिधित्व अति महत्वपूर्ण मामला है, हम यह सुझाव देना चाहते हैं (एक) कि परिषद् के संवर्ग में मुसलमान प्रतिनिधियों की संख्या, उस संप्रदाय के लोगों की संख्या के आधार पर, निर्धारित न की जाए, और किसी भी मामले में मुसलमान प्रतिनिधियों की संख्या निष्प्रभावी अल्प संख्यामें कमी न हो_ (दो) कि जहां तक संभव हो, नामनिर्देशन के बजाय निर्वाचन द्वारा नियुक्ति को प्राथमिकता दी जाए_ (तीन) कि मुसलमान सदस्यों को चुनने के लिए, मुसलमान जमींदारों, वकीलों, व्यवसायियों और अन्य महत्वपूर्ण हितों वाले प्रतिनिधियों, जिनकी सामाजिक स्थिति को महामहिम की सरकार द्वारा बाद में निर्धारित किया जाएगा - प्रांतीय परिषदों के मुसलमान सदस्यों और विश्वविद्यालयों के मुसलमान फैलो को, महामहिम की सरकार द्वारा इसके लिए निर्धारित की जाने वाली प्रक्रिया के अनुसार निर्वाचन अधिकार दिए जाएं।

कार्यकारी परिषद्

हाल में यह धारणा प्रबल होती जा रही है कि वाइसराय की कार्यकारी परिषद् में एक या दो भारतीय सदस्यों को ही नियुक्त किया जाएगा। इस प्रकार की नियुक्ति किए जाने की स्थिति में, हमारा यह अनुरोध है कि इस संबंध में मुसलमानों के दावों को नजरअंदाज न किया जाए। हम यह कहना चाहते हैं कि उस महान सभा में योग्यतापूर्ण कार्य करने के लिए उपयुक्त मुसलमान देश में उपलब्ध होंगे।

एक मुस्लिम विश्वविद्यालय

हम महामहिम का ध्यान एक और विषय की ओर दिलाना चाहते हैं, जिसका राष्ट्रीय हित पर गहरा असर पड़ सकता है। हमें विश्वास है कि एक संप्रदाय के रूप में हमारी आकाक्षाएं और हमारी भावी प्रगति बहुत हद तक एक ऐसे मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना पर निर्भर करती है, जो हमारे धार्मिक और बौद्धिक जीवन का केन्द्र होगा। इसलिए हमारा विनम्र अनुरोध है कि महामहिम इस उपक्रम की स्थापना में, जिसमें हमारे संप्रदाय की गहरी रुचि है, हमारी सहायता के लिए कदम उठाएंगे।

अंत में हम महामहिम को आश्वासन देना चाहते हैं कि प्रस्तुत याचिका में दर्ज परिस्थितियों और उल्लिखित दिग्गजों में भारतीय विषयों के विकास में मुस्लिम जनसंख्या की सहायता करके महामहिम साम्राज्य के प्रति अपनी उत्तरदायी निष्ठा के आधार को सुदृढ़ करेंगे और उनके राजनीतिक विकास और राष्ट्रीय समृद्धि की आधारशिला रखेंगे तथा आने वाली पीढि़यां इसे सदियों तक कृतज्ञतापूर्वक याद करेंगी। हमें विश्वास है कि महामहिम हमारी प्रार्थनाओं पर सहर्ष अपेक्षित ध्यान देंगे। हम स्वयं को महामहिम के आज्ञाकारी और विनम्र सेवक होने के नाते सम्मानित अनुभव करते हैं।