444 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
लार्ड मिंटो का उत्तर
मुस्लिम आकाक्षाओं का मूल्यांकन
याचिका प्रस्तुत किए जाने के बाद, महामहिम उठे, और एक अत्यधिक सहानुभूतिपूर्ण उत्तर दिया, जिसके बीच में प्रतिनिधिमंडल के सदस्यगण, वाह-वाह कहते हुए तालियों बजाते रहे, विशेष रूप से तब जब महामहिम ने यह घोषणा की कि वे प्रतिनिधिमंडल के विचारों से पूर्णतः सहमत हैं कि किसी भी निर्वाचन-पद्धति को इस महान साम्राज्य के विभिन्न धार्मिक पंथों का ध्यान रखना चाहिए और ब्रिटिश सरकार अपने अधीन विभिन्न संप्रदायों के राजनीतिक अधिकारों की भविष्य में भी पूर्ववत् सुरक्षा करती रहेगी। वाइसराय ने इतने सारे प्रतिनिधियों से भेंट करने का अद्वितीय अवसर देने के लिए प्रतिनिधिमंडल का धन्यवाद करते हुए अपना भाषण समाप्त किया।
वाइसराय ने कहाµ
सज्जनों, आपकी याचिका में उठाई गई अनेक बातों का उत्तर देने से पूर्व मैं आपका शिमला आने के लिए हृदय से स्वागत करता हूं। आज यहां आपकी उपस्थिति बहुत सार्थक है। उस याचिका में, जिसे आपने मुझे दिया है, विभिन्न राज्यों के मंत्रियों, बड़े-बड़े जमींदारों, वकीलों, व्यावसायियों और महामहिम की प्रजा के अनेक अन्य कुलीन व्यक्तियों के हस्ताक्षर हैं। मैं भारत में प्रबुद्ध मुस्लिम संप्रदाय के विचारों और आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करने वाले आपके प्रतिनिधिमंडल के प्रतिनिधियों का स्वागत करता हूं। मैं समझता हूं कि आपने छोटे-छोटे वैयक्तिक अथवा बिखरी हुई बस्तियों की राजनीतिक भावनाओं और विरोध से बिल्कुल भिन्न, भारत में विद्यमान राजनीतिक स्थितियों पर उपयुक्त विचार के आधार पर प्रतिनिधिक निकाय के रूप में सारतः ये बातें कहीं हैं और मैं इस्लाम के अनुयायियों के युक्तिसंगत उद्देश्यों और हमारे साम्राज्य के राजनीतिक इतिहास में हिस्सा लेने के निश्चय का अपना मूल्यांकन अभिव्यक्त करने का अवसर देने के लिए आप लोगों का आभारी हूं।
आपके वाइसराय के रूप में, इस विकासशील महाद्वीप की जनसंख्या की विभिन्न जातियों को ब्रिटिश शासन द्वारा दिए गए लाभों के संबंध में आप लोगों द्वारा व्यक्त की गई खुशी को देखकर, मैं गौरवान्वित अनुभव करता हूं। आपने स्वयं, एक शासित और शक जाति की संतति के रूप में, आज मुख्य वैयक्तिक स्वतंत्रता, पूजा की स्वतंत्रता, सामान्य शांति और आशावादी भविष्य, जिसे ब्रिटिश प्रशासन ने भारत में अक्षुण्ण रखा है, के बारे में बताया है।