446 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
सर सैयद का प्रभाव
अलीगढ़ ने प्रशंसा प्राप्त की है। इसके छात्रों ने अपने स्वयं के धर्म सिद्धांतों के लिए, निष्ठा और देशभक्ति के उपदेशों के लिए जीवन में दृढ़तापूर्वक संघर्ष किया है और अब भारत का राजनीतिक भविष्य निर्णायक मोड़ पर है, सर सैयद अहमद खान की प्रेरणा और अलीगढ़ की शिक्षा मुस्लिम इतिहास के गौरव में, निष्ठा में सामान्य सूझ-बूझ और सटीक तार्किकता में परिलक्षित हो रही है, जो आपकी याचिका में प्रभावशाली रूप से अभिव्यक्त की गई है। परन्तु सज्जनों, आप मुझे यह बता रहे हैं कि आप अपने शासकों के न्याय और निष्पक्ष व्यवहार के प्रति आश्वस्त हैं, आपको शायद मालूम होगा कि हाल की घटनाओं ने मुसलमानों की युवा पीढ़ी की भावनाओं को भड़का दिया है, जो संयमशील उपदेश और गंभीर मार्गदर्शन के नियंत्रण से परे जा सकती हैं।
पूर्वी बंगाल में नीति
अब पूर्वी बंगाल और असम के मामलों में कोई चर्चा करने की मेरी मंशा नहीं है, फिर भी आशा है कि किसी को नाराज किए बिना मैं नए प्रांत के मुसलमान संप्रदाय को संयम बरतने और आत्मनियंत्रण रखने के लिए, जो उन्होंने नई परिस्थितियों के अंतर्गत दर्शाया है, धन्यवाद देना चाहता हूं और इसके साथ-साथ मैं उन सबके साथ सहानुभूति रखता हूं जो बंगाली भावनाओं के हिमायती हैं। परन्तु सबसे पहले मैं आपको इस बात पर विश्वास करने के लिए कहूंगा कि नए प्रांत के मामलों में भविष्य के प्रति मैं आश्वस्त हूं जो जाति अथवा धार्मिक पंथ से पृथक इसकी वर्तमान और भावी जनसंख्या की बेहतरी के लिहाज से अपनाया गया है, और यह कि पूर्वी बंगाल और असम का मुसलमान संप्रदाय सदैव की भांति अपनी निष्ठा के मूल्यांकन और हितों की रक्षा कि लिए ब्रिटिश न्याय और निष्पक्षता पर विश्वास कर सकता है।
भारत में अशांति
सज्जनों, आपने मुझे उस समय याचिका दी है, जब राजनीतिक माहौल परिवर्तन के दौर में है। हम सब महसूस करते हैं कि इसके अस्तित्व, आशाओं और आकांक्षाओं के प्रति, जो भारत के लिए नई हैं, और वे स्वयं इन्हें महसूस करते हैं, इंकार करने का प्रयास करना बेवकूफी होगी। हम उनकी उपेक्षा नहीं कर सकते-ऐसा करके हम गलती करेंगे-परन्तु यह अशांति किस कारण से है? कुशासन से जन्में असन्तोष के कारण नहींµ जो ऐसी बात कहता है मैं उसका विरोध करता हूंµ और यह असन्तुष्ट लोगों के विद्रोह के कारण भी नहीं है।