38 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
यह पत्र राजा के सिर के साथ भेजा गया था। इसे प्राप्त करने के बाद हज्जाज ने अपने सेनापति को निम्नलिखित पत्र भेजा थाः
फ्इसके अलावा तुम सभी बड़े और छोटे को सुरक्षा दो। शत्रु और मित्र में
भेद न करो। खुदा का कथन है कि मूर्तिपूजकों से कोई रियायत न बरतो,
अपितु उनके गले काट दो। ख्1, यह समझ लो कि यही महान अल्लाह का
आदेश है। तुम्हें अभयदान देने के लिए तुरंत तैयार नहीं होना चाहिए, क्योंकि
इससे तुम्हारा काम और बढ़ जाएगा। इसके बाद उन दुश्मनों के अलावा
जो सामान्य सैनिक हैं किसी को न बख्शो।य्
गज़नी के मुहम्मद ने भी भारत पर अपने अनेक हमलों को जिहाद छेड़ने की संज्ञा दी थी। मुहम्मद के इतिहासकार अल उतबी ने उसके हमलों के बारे में लिखा थाः
फ्उसने मंदिरों में मूर्तियों को तोड़ा और इस्लाम की स्थापना की। उसने
शहरों पर कब्जा किया, नापाक कमीनों को मार डाला, मूर्ति-पूजकों को
तबाह किया और मुसलमानों को गौरवान्वित किया। तदुपरांत वह घर लौटा
और इस्लाम के लिए की गई विजयों का ब्यौरा दिया और यह संकल्प
व्यक्त किया कि वह हर वर्ष हिंद के खिलाफ जिहाद करेगाय्। ख्2,
मुहम्मद गोरी भी भारत पर हमलों में उसी धार्मिक जोश से प्रभावित था। इतिहासकार हसन निजामी ने उसके क्रियाकलाप का विवरण इन शब्दों में दिया हैः
फ्उन्होंने अपनी तलवार से हिंद को कुफ्र की गंदगी से साफ किया और
पाप से मुक्त किया तथा उस सारे मुल्क को बहुदेववाद के कंटक से
स्वच्छ किया और मूर्तिपूजा की अपवित्रता से पाक किया, और अपने शाही
शौर्य और साहस का प्रदर्शन करते हुए एक भी मंदिर को खड़ा नहीं रहने
दिया।य् ख्3,
तैमूर ने अपने संस्मरण में स्पष्ट किया है कि उसे किन कारणों ने भारत पर हमला करने को प्रेरित किया। वह कहता हैः
फ्हिंदुस्तान पर हमलों का मेरा मकसद काफिरों के खिलाफ अभियान चलाना
और मुहम्मद के आदेशानुसार उन्हें सच्चे दीन में धर्मांतरित करना है। (उस
पर और उसके परिवार पर अल्लाह की दया और रहमत हो) उस धरती
को मिथ्या आस्था और बहुदेववाद से पवित्र करना है। तथा मंदिरों और
- वही, पृ. 10
डॉ. टाइटस द्वारा उद्धृत पृष्ठ- II
वही, पृ. II