भाग - II पाकिस्तान के विरुद्ध हिंदू पक्ष - Page 48

एकता का विघटन

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मूर्तियों का विध्वंस करना है, हम गाज़ी और मुजाहिद होंगे और अल्लाह

की नजर में सहयोगी और सैनिक सिद्ध होंगे।य्ऽ

भारत पर मुसलमानों के हमले भारत के विरुद्ध हुए आक्रमण तो थे ही, साथ ही वे मुसलमानों में पारस्परिक युद्ध भी थे। यह तथ्य इसलिए छिपा रहा है क्योंकि सभी आक्रांताओं को बिना किसी भेदभाव के सामूहिक तौर पर मुसलमान करार दिया जाता है। परंतु तथ्य यह है कि वे तातार, अफगान और मंगोल थे। मुहम्मद गजनी तातार था। मुहम्मद ग़्ारी अफगानी था। तैमूर मंगोल था। बाबर तातार था, जबकि नादिरशाह और अहमदशाह अब्दाली अफगानी थे। अफगानों का भारत पर हमला करने के पीछे एक मकसद तातारों को तबाह करना था और मंगोल हमलावर तातारों व अफगानों को तबाह करना चाहते थे। उनका परस्पर प्रेम की भावना से संपुष्ट हुआ कोई ऐसा परिवार नहीं था जो मुस्लिम भाईचारे की भावना से एकजुट हो गया हो। वे एक-दूसरे के जानी दुश्मन थे और उनके युद्धों का मकसद एक दूसरे का सफाया करना भी था। मगर जिस बात को दिमाग में रखना महत्वपूर्ण है वह यह है कि अपने इन सभी विवादों और संघर्षों के बावजूद वे सभी इस एक सामूहिक उद्देश्य से प्रेरित थे - हिंदू धर्म का विध्वंस।

भारत पर आक्रमण करने वाले मुसलमानों ने जो तरीके अपनाए, वे भी उनके हमलों के मकसद को देखते हुए भारत के बाद के इतिहास की दृष्टि से कम महत्वपूर्ण नहीं हैं।

मुहम्मद बिन कासिम ने मज़हबी जोश के साथ जो पहला कार्य किया, वह था देवल नगर पर अधिकार कर लेने के बाद वहां के ब्राह्मणों का खतना कराना। परंतु जब उसे यह पता लगा कि वे इस तरह के धर्मांतरण पर आपत्ति उठा रहे हैं तो उसने सत्रह वर्ष से अधिक की आयु वाले सभी लोगों का वध करा दिया और यह आदेश दिया कि अन्य सभी को, जिनमें औरतें और बच्चे भी शामिल थे, गुलाम बना लिया जाए। हिंदुओं के मंदिरों को लूटा गया और लूट की इस प्रचुर संपदा के पांचवें हिस्से को अलग करके, जोकि सरकार का कानूनी हिस्सा था, शेष सारी संपदा सैनिकों में बराबर-बराबर बांट दी गई।

मुहम्मद गज़नी ने प्रारंभ से ही ऐसी योजनाएं अपनाईं जिनसे हिंदुओं के हृदय में आतंक व्याप्त हो सके। सन् 1001 में राजा जयपाल को पराजित करने के बाद मुहममद ने आदेश दिया कि जयपाल को फ्सड़कों पर घुमाया जाए ताकि उसके बेटे और सरदार उसे लज्जा, कैद और अपमान की उस हालत में देख सकें और देश भर के काफिरों के दिलों में इस्लाम की ताकत का खौफ बैठ जाए।य्

ऽ लेन पूल द्वारा ‘मीडियल इंडिया’ में उद्धरत, पृ. 155