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परिशिष्ट - 20
पूना समझौता ख्1,

प्रांतीय विधानमंडलों में सामान्य मतदान क्षेत्र स्थानों में से दलित वर्गों के लिए निम्नलिखित स्थान आरक्षित रखे जाएंगेः मद्रास 30_ सिंध सहित बंबई 15_ पंजाब 8_ बिहार और उड़ीसा 18_ मध्य प्रांत 20_ असम 7_ बंगाल 30_ संयुक्त प्रांत 20_ कुल 148।

ये आंकड़े प्रधानमंत्री के निर्णय में घोषित प्रांतीय परिषदों की कुल सदस्य-संख्या के आधार पर दिए गए हैं।

  1. इन स्थानों के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया के तहत संयुक्त मतदाताओं द्वारा चुनाव किया जाएगाः

किसी निर्वाचन क्षेत्र में सामान्य मतदाता सूची में दर्ज दलित वर्ग के सभी सदस्यों से मिलकर एक निर्वाचक-मंडल का गठन होगा, जो ऐसे प्रत्येक स्थान के लिए एकल मत प्रणाली द्वारा दलित वर्गों के चार उम्मीदवारों के एक पैनल का चुनाव करेंगे_ ऐसे प्राथमिक चुनाव में सर्वाधिक मत प्राप्त करने वाले चार व्यक्ति सामान्य मतदाताओं द्वारा चुनाव के उम्मीदवार होंगे।

  1. केंद्रीय विधानमंडल में दलित वर्गों के प्रतिनिधित्व का निर्धारण इसी प्रकार संयुक्त मतदाताओं और आरक्षित स्थानों द्वारा, जैसा कि प्रांतीय विधानमंडलों में उनके प्रतिनिधित्व के लिए उपरोक्त खंड-दो में किए गए परिशिष्ट के समान प्राथमिक चुनाव-पद्धति द्वारा किया गया।

ब्रिटिश भारत में केंद्रीय विधानमंडल में सामान्य मतदाताओं को आवंटित स्थानों के अट्ठारह प्रतिशत स्थान उक्त विधानमंडल में दलित वर्गों के लिए आरक्षित होंगे।

  1. केंद्रीय और प्रांतीय विधानमंडलों के लिए चुनाव हेतु उम्मीदवारों के पैनल के लिए प्राथमिक चयन-प्रणाली, जैसाकि इसमें इससे पहले उल्लेख किया गया है, पहले दस वर्षों के बाद, यदि नीचे दिए गए खंड-6 के प्रावधान के अंतर्गत परस्पर सहमति से इससे पहले समाप्त न की गई हो, समाप्त हो जाएगी।

  2. जैसाकि खंड 1 और 4 में प्रावधान किया गया है, प्रांतीय और केंद्रीय विधानमंडलों में स्थानों को आरक्षित करके दलित वर्गों के लिए प्रतिनिधित्व की प्रणाली, यदि समझौते से सम्बद्ध संप्रदायों के बीच परस्पर सहमति से निश्चित न की गई हो, तो जारी रहेगी।

  3. दलित वर्गों के लिए केंद्रीय और प्रांतीय विधानमंडलों हेतु मताधिकार लोथियन समिति की रिपोर्ट के अनुरूप होंगे।

  4. 25 सितम्बर, 1932 को हस्ताक्षरित।