भाग - II पाकिस्तान के विरुद्ध हिंदू पक्ष - Page 49

40 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

फ्काफिरों का संहार एक ऐसी बात थी जिसमें मुहम्मद को खास तौर के

आनंद का अनुभव होता था। 1019 ई. में चांदराय पर किए गए एक हमले

में अनेक काफिरों को मौत के घाट उतार दिया गया अथवा बंदी बना लिया

गया और मुसलमानों ने लूट के माल को तब तक कोई महत्व नहीं दिया

जब तक कि उन्होंने स्वयं को काफिरों तथा सूर्य और चंद्रमा के उपासकों

के संहार से तृप्त नहीं कर लिया। इतिहासकार ने बड़े सरल भाव से यह

भी लिखा है कि हिंदू सेना के हाथी मूर्तियों को छोड़कर स्वतः मुहम्मद

के पास आ गए और उन्होंने इस्लाम धर्म की सेवा करना ही श्रेयस्कर

समझा।य् †

हिंदुओं की बार-बार हत्याओं से, मुहम्मद बख्तियार खिलज़ी की बिहार-विजय की तरह, हिंदुओं को अपनी संस्कृति को गहरा आघात लगा। ‘तबकाते-नसीरी’ से हमें यह जानकारी मिलती है कि जब उसने नुद्दिया (बिहार) पर कब्जा कर लिया तो क्या हुआः

फ्विजेताओं ने भयंकर लूटपाट की। वहां के अधिकांश निवासी ब्राह्मण थे,

जिनके सिर मुंडे हुए थे। उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया। बहुत भारी

संख्या में पुस्तकें प्राप्त हुईं, परन्तु उनके अर्थ स्पष्ट करने वाला कोई था

ही नहीं, क्योंकि सभी लोग मारे गए थे, जबकि सारा किला और नगर ही

अध्ययन का एक स्थान था।ऽ

इस मुद्दे पर उपलब्ध साक्ष्य का सारांश प्रस्तुत करते हुए डॉ. टाइटस ने कहा हैः

फ्मंदिरों के विध्वंस और प्रतिमाओं को अपवित्र किए जाने के पर्याप्त

साक्ष्य उपलब्ध हैं। हम देख चुके हैं कि मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध

में बड़े योजनाबद्ध ढंग से विनाश की अपनी योजना को क्रियान्वित किया

था। परंतु उसने राजस्व के मकसद से मुलतान के एक सुप्रसिद्ध मंदिर को

छोड़ दिया था, क्योंकि यह मंदिर तीर्थयात्रियों का आवास स्थल था, जो

प्रतिमा के सामने काफी बड़ी मात्रा में उपहार समर्पित करते थे। साथ ही

उसने जहां इस मंदिर को अपनी धनलोलुपता को संतुष्ट करने के लिए

खड़ा रहने दिया, वहीं उसने गौ-मांस का एक टुकड़ा प्रतिमा की गर्दन में

बांधकर अपनी विद्वेष-भावना को भी उजागर किया।

फ्मिन्हाज-अस-सिराज यह भी बताता है कि मुहम्मद किस तरह से

एक हजार मंदिरों तथा सोमनाथ के मंदिरों को विध्वस्त करने वाले तथा

ऽ डॉ. टाइटसः इंडियन इस्लाम, पृ. 22

† वही, पृ. 22