472 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
ने रेलों में उन राजपत्रित पदों पर, जिन पर अखिल भारतीय आधार पर भर्ती की जाती है, आंग्ल-भारतीयों और प्रवासी यूरोपियनों की भर्ती के प्रश्न पर विशेष ध्यान दिया। इन पदों में उनके वर्तमान प्रतिनिधित्व को बनाए रखने के लिए आंग्ल-भारतीय और प्रवासी यूरोपियन संप्रदाय को भारतीय संप्रदायों के सदस्यों को उपलब्ध कुल रिक्तियों का लगभग 9 प्रतिशत प्राप्त करना आवश्यक होगा। भारत सरकार स्वयं इस बात से संतुष्ट है कि यह संप्रदाय इस समय इन राजपत्रित पदों पर पदोन्नति और सीधी भर्ती द्वारा इन रिक्तियों का 9 प्रतिशत प्राप्त कर लेता है। ऐसी परिस्थितियों में, यह निर्णय लिया गया है कि इस समय विशेष आरक्षण की आवश्यकता नहीं है। जब कभी ये संप्रदाय रिक्तियों के 9 प्रतिशत से कम स्थान प्राप्त करेंगे तो यह विचार किया जाएगा कि उनके युक्तिसंगत हितों की रक्षा के लिए सीधी भर्ती के संबंध में क्या व्यवस्था की जानी चाहिए।
भाग- IV ः स्थानीय रूप से भर्ती वाली
सेवाओं के लिए नियम
(8) उन सभी सेवाओं के मामलों में, जिनके लिए स्थानीय क्षेत्रों से भर्ती की जाती है और अखिल भारतीय आधार पर नहीं अर्थात् रेलवे, डाक व तार विभाग, सीमा-शुल्क सेवा, आयकर विभाग आदि में अधीनस्थ पदों पर ऊपर दिए गए सामान्य नियम निम्नलिखित परिवर्धनों के तहत लागू होंगे-
I. किसी क्षेत्र में मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यक संप्रदायों की जनसंख्या
के अनुपात और संबद्ध क्षेत्र की स्थानीय सरकार द्वारा अपनाए गए
भर्ती-नियमों के आधार पर प्रत्येक रेलवे अथवा स्थानीय क्षेत्र अथवा
मंडल के लिए एक प्रतिशत निर्धारित करके संपूर्ण भारत के लिए
मुसलमानों को 25 प्रतिशत और अन्य अल्पसंख्यक संप्रदायों को
8.1/3 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।
II. रेलवे और तार विभाग और सीमा-शुल्क सेवा, जहां इस समय आंग्ल-भारतीय
और प्रवासी यूरोपियन संप्रदाय के लोग प्रमुखतः नियोजित हैं, के मामले में
उपरोक्त पैरा-2 में दी गई नीति को लागू करने के उद्देश्य से अगले पैरा
में दिए गए विशेष उपबंध करने अपेक्षित हैं।
- (1) (क) आंग्ल-भारतीय और प्रवासी यूरोपियन संप्रदाय के लोग रेलवे के 8.8 प्रतिशत अधीनस्थ पदों पर नियुक्त हैं। उनकी स्थिति सुरक्षित करने के लिए सीधी भर्ती द्वारा भरे जाने वाली सभी रिक्तियों के 8 प्रतिशत स्थान इस संप्रदाय के सदस्यों के लिए आरक्षित होंगेः ( i ) प्रत्येक रेलवे में इस समय नियोजित इस संप्रदाय