42 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
अजमेर की विजय के दौरान मूर्तियों वाले मंदिरों के स्तंभों और आधारों को ध्वस्त किया ओर उनके स्थान पर मस्जिदों का निर्माण करवाया और मकतब बनवाए और इस्लाम के नियम और कानून की प्रथाएं तैयार कर उन्हें स्थापित किया। दिल्ली नगर और उसके आसपास के क्षेत्रों को मूर्तियों और मूर्तिपूजकों से मुक्त कर दिया गया और देव-प्रतिमाओं के स्थान पर एक खुदा की इबादत करने वालों ने मस्जिद खड़ी कर दी। ‘‘कहा जाता है कि कुतुबुद्दीन ऐबक ने भी लगभग एक हजार मंदिरों को ध्वस्त कर उनके स्थान पर मस्जिदें खड़ी की थीं। उसी लेखक का कहना है कि उसने जामा मंस्जिद दिल्ली का निर्मण कराया और उसे उन मंदिरों से प्राप्त हुए स्वर्ण तथा पाषाणों से सजाया जिन्हें हाथियों द्वारा तोड़ा गया था। उसे उन शिलालेखों से भर दिया जिनमें कुरान के आदेश उत्कीर्ण थे। दिल्ली की इस मस्जिद के पूर्वी प्रवेश द्वार पर जो शिलालेख अंकित हैं, उनमें यह बताया गया है कि इस मस्जिद के निर्माण में 27 मंदिरों की सामग्री का उपयोग किया गया था।
फ्जामा मस्जिद की कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा बनाई गई एक मीनार के मुकाबले अलाउद्दीन ने दूसरी मीनार बनाने के जोश में, अमीर खुसरो के कथनानुसार, पहाडि़यों से खोदकर पत्थर ही नहीं निकाले, अपितु सामग्री के लिए काफिरों के मंदिरों को भी तोड़ा। दक्षिण भारत की अपनी विजयों में भी अलाउद्दीन ने मंदिरों को उसी तरह तोड़ा जिस तरह उत्तर में उसके पूर्ववर्तियों ने तोड़ा था।
फ्सुलतान फिरोज शाह ने अपने फतुहात में विस्तृत वर्णन करके यह बताया है कि उसने उन हिंदुओं के साथ किस तरह का व्यवहार किया जिन्होंने नए मंदिरों के बनाने का साहस किया था। जब उन्होंने पैगंबर के कानून के विरुद्ध जिसमें यह घोषित किया गया कि यह सब सहन नहीं किया जाना चाहिए, शहर (दिल्ली) और उसके पास-पड़ोस में ऐसा किया, तो मैंने खुदाई निर्देशों के तहत इन इमारतों को ध्वस्त कर दिया। मैंने काफिरों के उन नेताओं को मार डाला और अन्य को कोड़े लगवाकर तब तक दंडित किया कि जब तक उस बुराई का पूरी तरह उन्मूलन नहीं हो गया जिसमें काफिर और मूर्तिपूजक मूर्तियों की पूजा करते थे। खुदा के रहमोकरम से अब मुसलमान सच्चे खुदा के प्रति अपनी आस्थाओं का परिपालन करते हैं।य्ऽ
ऽ लेन पूल, ‘मीडिवल इंडिया’, पृ. 26