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एकता का विघटन

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हमने पढ़ा है कि शाहजहां के शासनकाल में भी उन मंदिरों को तोड़ा गया था जिन्हें हिंदुओं ने पुनः बनाना शुरू किया था और इस तरह हिंदुओं की धर्मपरायणता पर इस सीधे हमले का उल्लेख ‘बादशाह नामा’ में भी सगौरव दर्ज हैः

फ्इतिहासकार कहता है कि बादशाह का ध्यान इस ओर दिलाया गया कि

पिछले (अकबर के) शासन के दौरान अनेक मंदिरों का, जिनमें मूर्तियां

हैं, बनारस में निर्माण शुरू हो गया था, जो अपूर्ण है। वह कुफ्र का सुदृढ़

केंद्र है। काफिर अब उन्हें पूरा करने के इच्छुक हैं। बादशाह सलामत, जो

दीन के रक्षक हैं, ने आदेश दिया कि बनारस और उनकी पूरी सल्तनत में

हर जगह उन मंदिरों को गिरा दिया जाए, जिनका निर्माण शुरू हुआ था।

इलाहाबाद प्रांत से यह सूचना मिली है कि बनारस जिले में 76 मंदिरों को

गिराया गया है।य् [†]

मूर्तिपूजा को उखाड़ फेंकने का अंतिम प्रयास औरंगजेब के जिम्मे आया। ‘माआथिर-ए-आलमगीरी’ में हिंदू शिक्षा के उन्मूलन और उसके द्वारा मंदिरों का विध्वंस किए जाने का विस्तृत विवरण निम्नलिखित शब्दों में किया गया हैः

फ्अप्रैल 1669 ई. में औरंगजेब को यह ज्ञात हुआ कि थट्टठ्ठा, मुलतान और

बनारस प्रांतों, खासतौर पर अंतिम में, मूर्ख ब्राह्मण अपनी पाठशालाओं में

तुच्छ पुस्तकों की व्याख्याएं करते हैं और शिष्य, जिनमें मुसलमान और हिंदू

दोनों हैं, लंबी दूरी तय कर वहां जाते हैं। परिणामतः दीन के निगहबान ने

सभी प्रांतों के सूबेदारों को यह आदेश दिया कि वे काफिरों की पाठशालाओं

और मंदिरों को निस्संकोच गिरवा दें, और उन्हें यह काम भी सौंपा गया

कि वे मूर्ति-पूजा की शिखा और चलन को पूरी तरह रोक दें....। बाद में

दीन के रक्षक को यह बताया गया कि सरकारी अधिकारियों ने बनारस के

विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त कर दिया है।य्ऽ

जैसा कि डॉ. टाइटस ने ही लिखा हैः

फ्मुहम्मद और तैमूर जैसे आक्रांता बलात् धर्मांतरण के बजाए आर्थिक

भावना अर्थात् लूट से धन-संग्रह, बंदी बनाए लोगों को गुलाम बनाने और

धर्मांतरण की तलवार से काफिरों को दोजख भेजने पर ही ज्यादा ध्यान देते

थे। परंतु जब शासक स्थाई तौर पर बस गए तो धर्मांतरितों का विश्वास

ऽ डॉ. टाइटस, ‘इंडियन इस्लाम’, पृ. 23-24

† वही, पृ. 24