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एकता का विघटन

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फ्उन्हें खि़राज (कर) अदा करने वाला कहा जाता है, और जब राजस्व

अधिकारी उनसे चांदी मांगे तो उन्हें बिना सवाल उठाए अति विनम्रता और

आदर व्यक्त करते हुए सोना देना चाहिए। यदि अधिकारी उनके मुंह में

मैला फेंके तो उन्हें संकोच किए बिना अपना मुख खोलकर उसे ले लेना

चाहिए...। मुंह में मैला फेंके जाने और इस विनम्र अदायगी से धर्म की

अपेक्षित अधीनता ही व्यक्त होती है। इस्लाम का गरिमागान एक कर्तव्य है

और दीन के प्रति अनादर दंभ है। खुदा उनसे नफरत करता है और उसका

कथन है कि उन्हें दासता में रखो। हिंदुओं को अपमानित करना खासतौर पर

एक मज़हबी फर्ज है, क्योंकि वे पैगंबर के सर्वाधिक कट्टठ्ठर दुश्मन हैं और

क्योंकि पैगंबर ने हमें उनका कत्ल करने, उन्हें लूटने और गुलाम बनाने का

आदेश यह कहते हुए दिया है - उन्हें इस्लाम में दीक्षित करो अथवा मार

डालो और उन्हें गुलाम बनाओ और उनकी धन-संपदा को नष्ट कर दो।

किसी अन्य धर्माचार्य ने नहीं, अपितु महान धर्माचार्य (हनीफ) ने जिसकी

राह के हम अनुगामी हैं, हिंदुओं पर जजि़या लगाए जाने की इजाजत दी

है, अन्य पंथों के धर्माचार्य भी किसी अन्य विकल्प की नहीं अपितु ‘मौत

या इस्लाम’ की ही अनुमति देते हैं।य्ऽ

मुहम्मद गज़नी के आने और अहमदशाह अब्दाली की वापसी के बीच जो 762 वर्षों की अवधि व्यतीत हुई उसकी यही कहानी है।

हिंदुओं को यह कहने का हक कहां तक है कि उत्तरी भारत आर्यवर्त का भाग है? हिंदुओं को यह कहने का कितना अधिकार है कि चूंकि एक बार यह क्षेत्र उनका था, अतएव हमेशा ही भारत का अविभाज्य अंग रहना चाहिए? जो लोग पृथकता का विरोध करते हैं और अफगानिस्तान सहित उत्तरी भारत जो कभी भारत का भाग था और उस क्षेत्र के लोग बौद्ध अथवा हिंदू थे इस प्राचीन तथ्य से उद्भूत ‘ऐतिहासिक भावना’ पर बल देते हैं, उनसे यह पूछा ही जाना चाहिए कि क्या 762 वर्षों से अनवरत मुस्लिम आक्रमणों की घटनाओं को, जिस उद्देश्य से वे किए गए थे और अपने मकसद को पूरा करने के लिए इन आक्रांताओं ने जो हथकंडे अपनाए थे, क्या उन्हें महत्वहीन मान लिया जाए?

इन आक्रमणों की जो अन्य परिणतियां हुईं, उनके अलावा भी मेरी राय में उन उत्तरी क्षेत्रों को संस्कृति और स्वरूप में बहुत ठोस बदलाव आया है जिसे अब पाकिस्तान में शामिल करना प्रस्तावित है। स्थिति यह है कि इस क्षेत्र और शेष भारत के बीच एकता तो है ही नहीं, अपितु दोनों के मध्य वास्तविक विद्वेष एक तथ्य बन गया है।

ऽ लेन पूल, ‘मिडिवल इंडिया’, पृ. 104