52 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
फ्यह असंभव होगा कि हमारे भारतीय साम्राज्य के उत्तर-पश्चिम में कोई
ऐसी सीमा-रेखा बनाई जा सके जो ऐतिहासिक व सांस्कृतिक, राजनीतिक
व सैनिक आवश्यकताओं को पूरा कर सके। यह सोचना महज काल्पनिक
होगा कि ऐसा क्षेत्र बने जिसकी सुपरिभाषित भौगोलिक विशेषताएं हों, जो
परस्पर निकट जनजातीय क्षेत्रों के टुकड़े करके नृ-जातीय सिद्धांतों की
अवहेलना न करे और फिर भी राजनीतिक सीमा का काम करे।य्
जहां तक इतिहास बताता है, भारत की कोई एक वैज्ञानिक सीमा नहीं रही और अलग-अलग लोगों ने भारत के लिए अलग-अलग सीमाओं का समर्थन किया है। सीमाओं के प्रश्न को लेकर दो नीतियां सामने आई हैं - ‘अग्रवर्ती या फॉरवर्ड’ नीति और ‘वापस सिंध तक’ की नीति। सर जॉर्ज मैकमन के शब्दों में, अग्रवर्ती नीति के दो अभिप्राय हैं - व्यापक और संकुचित। व्यापक अभिप्राय का अर्थ है अफगानिस्तान के मामलों पर कड़ा नियंत्रण, जो भारत के लिए रक्षा-कवच का काम दे और भारतीय प्रभाव को आमू दरिया तक बढ़ा दे। इसका संकुचित अभिप्राय यह है कि जैसा डुरेंडलाइन की परिभाषा में बताया गया है, प्रशासित क्षेत्र अर्थात् उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत और अफगानिस्तान के बीच की कबायली पहाडि़यों को मिला लिया जाए और ब्रिटिश नियंत्रण उस लाइन या सीमा तक प्रभावी रहे। भारत की सीमा का सुरक्षा के आधार के लिए अग्रवर्ती नीति का व्यापक अभिप्राय बहुत पहले ही त्याग दिया गया है। फलतः अब हमारे पास चुनने के लिए तीन संभावित सीमा रेखाएं बचती हैं - (1) सिंधु नदी, (2) उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत की वर्तमान प्रशासनिक सीमा और (3) डूरेंड लाइन। पाकिस्तान से हिंदुस्तान की सीमा-रेखा वापस सिंध नदी तक पहुंच जाएगी, बल्कि सिंध के भी पीछे सतलज नदी तक। परंतु ‘वापस सिंध तक’ नीति के समर्थकों की भी कमी नहीं थी। सिंध सीमा का सबसे बड़ा समर्थक था लॉर्ड लारेंस, जो इस बात का घोर विरोधी था कि सिंधु पार की पहाडि़यों की तलहटी से आगे बढ़ा जाए। वह इस बात का समर्थक था कि किसी भी आक्रमणकारी का मुकाबला सिंध की घाटी में किया जाए। उसकी राय में यह भारी गलती और कमजोरी होगी कि युद्ध सिंध के आधार से बहुत दूरी पर किया जाए और आक्रमणकारी सेना को अफगानिस्तान और कबायली इलाके में जितना अधिक फासला तय करना पड़ेगा उतनी ही ज्यादा वहां परेशानी होगी। निस्संदेह दूसरे लोगों का यह कहना है कि रक्षा की दृष्टि से नदी की सीमा काफी कमजोर लाइन या सीमा होती है। तथापि सिंध को