5. रक्षा व्यवस्था में कमजोरी - Page 74

रक्षा-व्यवस्था में कमजोरी

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कार्यों में तैनाती के लिए भारतीय टुकडि़यों की अपेक्षा ब्रिटिश टुकडि़यों का

अनुपात बढ़ गया। इसका कारण ब्रिटिश सैनिक की निष्पक्षता थी तथा उस

पर यह संदेह नहीं किया जा सकता था कि वह मुस्लिमों के विरुद्ध हिंदुओं

या हिंदुओं के विरुद्ध मुस्लिमों का पक्ष लेगा। ...इतना ही नहीं, अधिकांश

दंगे जिनमें सेना के हस्तक्षेप की जरूरत होती है वे साम्प्रदायिक अथवा

धार्मिक प्रकृति के होते हैं, और इसलिए यह स्वाभाविक और अनिवार्य हो

जाता है कि सरकारी हस्तक्षेप निष्पक्ष, प्रभावी तथा दोनों पक्षों के संदेह से

परे हो। इस सम्बन्ध में यह ध्यान आकृष्ट कराने वाला तथ्य है कि सम्पूर्ण

भारत में सेना की नियमित यूनिटों में ब्रिटिश सैनिकों की संख्या कम है

और उनका अनुपात 2 ½ और 1 का है। किंतु आंतरिक सुरक्षा के लिए

आवंटित टुकड़ी में यह अनुपात विपरीत हो जाता है और इस उद्देश्य के

लिए ब्रिटिश टुकडि़यों की तैनाती में प्रधानता होती थी। आंतरिक सुरक्षा

के लिए निर्दिष्ट टुकडि़यों में सात भारतीय सैनिकों के अनुपात में लगभग

310 ब्रिटिश सैनिक होते थे। इस काम के लिए मुख्यतः अंग्रेज टुकडि़यों

का उपयोग किया जाता है - आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने वाली टुकडि़यों

में आठ अंग्रेज सिपाहियों के मुकाबले सात हिंदुस्तानी सिपाही होते हैं।य्

हिंदुस्तानी फौज की इस विशिष्टता की चर्चा करते हुए कमीशन ने निम्नलिखित टिप्पणी कीः

फ्अब जब कोई गंभीरतापूर्वक भारत के भविष्य पर विचार करता है, जिसमें

वर्तमान फौजी संगठन की जगह देश की रक्षा करने और वहां अमन-चैन

बनाए रखने का काम केवल हिंदुस्तानी टुकडि़यों को सौंप दिया जाएगा,

जैसे कनाडा में कनाडियन टुकडि़यां होती हैं, और आयरलैंड में आयरिश

टुकडि़यां, तो यह जरूरी है कि भारत में अमन-चैन बनाए रखने की समस्या

की इस विशिष्टता और आजकल देश में शांतिपूर्ण सरकार का मसर्थन

करने में अंग्रेज फौजी जो भूमिका निभाते हैं, उसे ध्यान में रखा जाए, और

कुछ इस तरह कि देश के ग्रामीण क्षेत्रों की संतुष्टि हो सके।य्

हिंदुस्तानी फौज की तीसरी अनूठी विशेषता, जिसकी चर्चा साइमन कमीशन ने की थी यह है कि इसमें उत्तर-पश्चिम के लोगों का भारी बाहुल्य है। इस बाहुल्य की शुरुआत कैसे हुई और इसकी सरकारी व्याख्या के पीछे जो कारण हैं, उन पर पहले ही प्रकाश डाला जा चुका है।

किंतु हिंदुस्तानी फौज की एक और बड़ी विशेषता की चर्चा तक साइमन कमीशन ने नहीं की। कमीशन ने या तो इसकी उपेक्षा की, या उसे इसकी जानकारी नहीं थी।