5. रक्षा व्यवस्था में कमजोरी - Page 80

रक्षा-व्यवस्था में कमजोरी

71

और उसकी जानकारी प्राप्त करने में जितना समय और श्रम लगेगा, उसे देखते हुए यह एकत्रित करना उचित नहीं लगता।

(घ) नहीं।

(च) प्रश्न के पहले भाग का उत्तर ‘नहीं’ में है और यहां तक दूसरे भाग के उत्तर का संबंध है, भारत के पास पहले से ही एक कुशल फौज है, और जितने आर्थिक साधन हैं उनके अनुरूप उन्हें सभी तरह से लैस रखने की चेष्टा की जाती है।

श्री एस. सत्यमूर्तिः प्रश्न के भाग (घ) और (घ) के संदर्भ में, क्या मैं जान सकता हूं कि क्या सरकार का ध्यान बहुत से जनप्रतिनिधियों के इन वक्तव्यों की ओर गया है कि फौज का अधिकांश हिस्सा पंजाब से और एक विशेष संप्रदाय से लिया गया है? क्या सरकार ने इन तथ्यों पर विचार किया है और क्या सरकार इस पर भी विचार करेगी कि अन्य सभी प्रांतों और सभी संप्रदायों के लोगों को भरती करके फौज को सच्चे अर्थों में राष्ट्रीय बनाया जाए ताकि सैनिक तानाशाही द्वारा राजनीतिक सत्ता हथियाए जाने के खतरे से, जो सभी देशों में विद्यमान है, बचा जा सके?

श्री सी.एम.जी. आगिल्वीः मुझे समझ में नहीं आया कि इस सवाल से यह बात कैसे पैदा हुई, परंतु मैं यह कहने के लिए तैयार हूं कि सरकार के हिसाब-किताब में प्रांतीय सीमाएं कतई नहीं आईं। किसी प्रांत को नहीं, बल्कि हिंदुस्तान को सर्वोत्तम फौजें देने के लिए सर्वोत्तम सिपाहियों का चुनाव किया जाता है और इसके लिए राष्ट्रीय महत्व प्रांतीय महत्व से ऊपर है। जहां सर्वोत्तम फौजी जवान उपलब्ध होंगे, वहीं से लिए जाएंगे_ और कहीं से नहीं।

श्री एस. सत्यमूर्तिः क्या मैं यह जान सकता हूं कि अधिकांश फौजी पंजाब से हैं और क्या सरकार अभी हाल ही में हिंदुस्तानी फौज में मेरे प्रांत के लोगों के बहादुर कारनामों को भूल गई है और क्या मैं यह जान सकता हूं कि मद्रासियों को फौज से लगभग अलग रखा जाता है और कई अन्य प्रातों के लोगों को सेना में बिल्कुल ही नहीं लिया जाता?

श्री सी.एम.जी. आगिल्वीः मद्रास को सेना से अलग नहीं रखा जाता। सरकार बड़ी खुशी से मद्रासियों की वीरतापूर्ण सेवाओं को स्वीकार करती है और अब उन्हें उन टुकडि़यों में भरती किया जाता है जहां अनुभव ने उन्हें सर्वोत्तम सिद्ध किया है। लगभग 4,500 मद्रासी मुख्यतः सफरमैनों और सुरंगें साफ करने वालों और तोपखानों में हैं।