5. रक्षा व्यवस्था में कमजोरी - Page 84

रक्षा-व्यवस्था में कमजोरी

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श्री सी.एम.जी. आगिल्वीः सरकार का विचार है कि इसके कोई खतरनाक निहितार्थ नहीं हैं, बल्कि बात इसकी उल्टी है।

श्री एस. सत्यमूर्तिः चाहे यह तथ्य ही क्यों न हो, फिर भी क्या सरकार एक उत्तरदायी सार्वजनिक व्यक्ति द्वारा व्यक्त किसी प्रांत या संप्रदाय की प्रभुता के विचार को वांछनीय समझती है, और क्या सरकार का यह विचार नहीं है कि इससे फौज में प्रांतीय और सांप्रदायिक विवाद होंगे और ईर्ष्या बढ़ेगी और शायद देश में फौजी तानाशाही की संभावना बढ़ेगी।

श्री सी.एम.जी. आगिल्वीः सरकार इनमें से किसी भी आशंका का कोई कारण नहीं देखती।

श्री एम.एस. अणेः क्या सरकार सर सिकंदर हयात खां के वक्तव्य में कही गई नीति से सहमत है?

श्री सी.एम.जी. आगिल्वीः इस बारे में सरकार की नीति बार-बार दोहराई जा चुकी है और स्पष्ट की जा चुकी है।

श्री एम.एस. अणेः क्या सरकार की नीति है कि फौज में पंजाब का वर्चस्व रहे?

श्री सी.एम.जी. आगिल्वीः सरकार की नीति है कि फौज में सर्वोत्तम व्यक्ति भरती किए जाएं।

श्री एम.एस. अणेः मैं अपना प्रश्न फिर दोहराता हूं - क्या सरकार की यह नीति है कि फौज में पंजाब का वर्चस्व रहे?

श्री सी.एम.जी. आगिल्वीः मैंने बार-बार इस प्रश्न का उत्तर दिया है। नीति यह है कि फौज में सभी प्रांतों से सर्वोत्तम व्यक्ति लिए जाएं और सरकार इस बारे में संतुष्ट है कि आजकल फौज में सर्वोत्तम व्यक्ति हैं।

श्री एम.एस. अणेः इसलिए क्या यह जरूरी नहीं है कि सरकार सर सिकंदर हयात खां द्वारा सुझाई गई नीति को संशोधित करते हुए एक वक्तव्य दे?

श्री सी.एम.जी. आगिल्वीः सरकार का अपनी नीति बदलने का कोई विचार नहीं है।

एक बार फिर 23 नवंबर, 1938 को इस बारे में निम्नलिखित प्रश्न पूछे गए।