5. रक्षा व्यवस्था में कमजोरी - Page 90

रक्षा-व्यवस्था में कमजोरी

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अर्थ है कि मद्रास और बंबई के सिपाहियों की जगह बंगाल फौज के

रिज़र्व सिपाहियों को दे दी जाए और वे उन्हीं वर्गों के हों जो बंगाल फौज

में हैं, तो मैं कहूंगा कि इससे अधिक बुद्धिहीनता और विवेकशून्यता की

बात और क्या होगी।य्

पंजाब के लेफटीनेंट गवर्नर भी इस राय से सहमत थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि फ्मैं पूरी भारतीय सेना के लिए एक ही क्षेत्र से भरती करने का विरोधी हूं।य् उन्होंने कहा कि राजनीतिक कारणों से भी यह आवश्यक होगा कि किसी एक संप्रदाय के वर्चस्व को रोका जाए।

स्पेशल कमेटी ने इस राय को स्वीकार कर लिया और सिफारिश की कि हिंदुस्तानी फौज का नियमन इस तरह से किया जाए कि फौज में किसी एक संप्रदाय या कौम का वर्चस्व न हो।

हिंदुस्तानी फौज संबंधी नीति इन्हीं दो सिद्धांतों से नियंत्रित होती है। 1879 की स्पेशल आर्मी कमेटी ने जो सिद्धांत निर्धारित किया था, उसे ध्यान में रखते हुए आजकल हिंदुस्तानी फौज की सांप्रदायिक संरचना में परिवर्तन किए गए हैं। उन्हें पूर्ण क्रांति कहा जा सकता है। यह क्रांति कैसे होने दी गई, यह बिल्कुल समझ में नहीं आता। यह ऐसी क्रांति है जो एक सुस्थापित सिद्धांत के विरुद्ध जाकर की गई है। वास्तव में यह सिद्धांत हिंदुस्तानी फौज में उत्तर-पश्चिम के लोगों की बढ़ती हुई प्रमुखता के कारण सुझाया गया था और इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने की दृष्टि से इसे लागू किया गया था। यह सिद्धांत न केवल मार्गदर्शक नियम की तरह अपनाया गया था, बल्कि इसे बड़ी कड़ाई से लागू भी किया गया था, लॉर्ड रॉबर्ट्स यद्यपि इस सिद्धांत का विरोधी था क्योंकि इसके कारण उत्तर-पश्चिम के उसके चहेते लोगों की भर्ती पर एक हद तक रोक लग जाती थी, तथापि तत्कालीन भारत के कमांडर-इन-चीफ के रूप में उसे इसके आगे झुकना पड़ा था। इस सिद्धांत का इतना अधिक आदर किया जाता था कि 1903 में जब लॉर्ड किचनर ने 15 मद्रासी रेजीमेंटों को पंजाबी रेजीमेंटों में बदलने की परियोजना पर काम शुरू किया, तो उसने मुसलमान और सिख रेजीमेंटों का प्रतिसंतुलन बनाए रखने के लिए गुरखा और पठान लोगों का अनुपात बढ़ा दिया। उसके जीवनी लेखक सर जॉर्ज ऑर्थर का कहना हैः

फ्गदर ने जो पाठ सिखाया था, उसके बाद सरकार इस बारे में सचेत हो गई

थी कि हिंदुस्तानी फौज में किसी एक तत्व को जरूरत से ज्यादा प्रमुखता

देना कितना खतरनाक हो सकता है। पंजाबी पैदल सेना में वृद्धि करने का

एक अनिवार्य परिणाम यह निकला कि गुरखा लोगों की और भर्ती की गई

तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के पठानों को फ्रंटियर मिलिशिया में लिया गया।य्