3. तुच्छ चालें - Page 102

तुच्छ चालें

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  1. ब्रिटिश सरकार चाहती है कि यह भली-भांति समझ लिया जाए कि वे समुदाय अपने आप में ऐसी बातचीत में कोई पक्ष नहीं बन सकते, जिससे उनके द्वारा किए गए फैसले पर फिर से विचार करने की पहल हो सके जिसमें कोई संशोधन किया जाए और प्रतिनिधित्व के प्रश्न पर किसी संशोधन पर विचार नहीं कर सकते। परंतु उनकी हार्दिक इच्छा है कि यदि सद्भावनापूर्ण समझौतों की संभावनाएं हैं तो वे नष्ट न हो जाएं। इसलिए भारत सरकार के अधिनियम को कानून बनने से पहले यदि वे कार्यान्वयन योग्य किसी अन्य योजना पर संबंधित समुदायों में पारस्परिक समझौता हो जाता है, वह चाहे किसी एक या अधिक प्रांतों अथवा पूरे ब्रिटिश भारत के लिए हो, तो उन सुझावों को साकार रूप देने के लिए संसद से सिफारिश की जाएगी कि अब प्रस्तुत विकल्पों को इसमें शामिल कर लिया जाए।

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  6. दलित वर्गों के वे सदस्य, जो मतदान करने के पात्र हैं, सामान्य निर्वाचन क्षेत्र में मतदान कर सकेंगे। यह देखते हुए कि ये वर्ग केवल इसी तरीके से अपने बलबूते पर विधायिकाओं में समुचित प्रतिनिधित्व नहीं पा सकेंगे, उन्हें उतने समय तक के लिए ही विधायिकाओं में उचित प्रतिनिधित्व मिल सके, इस उद्देश्य से जैसा कि तालिका में दिखाया गया है, उनके लिए

खास क्षेत्र नियत किए गए हैं। वे सीटें उन विशेष निर्वाचन-क्षेत्रों में केवल चुने गए दलित वर्गों द्वारा ही भरी जाएंगी। कोई भी मतदाता, जो विशेष निर्वाचनक्षेत्र में मतदान करेगा, वह सामान्य निर्वाचन-क्षेत्र में भी मतदान कर सकेगा। ये विशेष निर्वाचनक्षेत्र मद्रास को छोड़ उन चुने हुए इलाकों में बनाए जाएंगे, जहां दलित वर्गों की आबादी अधिक हो। परंतु ये निर्वाचन-क्षेत्र पूरे प्रांत में नहीं फैले होंगे।

बंगाल में ऐसा करना संभव है, जहां सामान्य निर्वाचन-क्षेत्रों में दलित मतदाताओं की संख्या अधिक है। इस प्रकार जब तक इस विषय में पांच रिपोर्ट नहीं मिल जाती, तब तक बंगाल में दलित वर्गों के विशेष निर्वाचन-क्षेत्रों