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तुच्छ चालें

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सम्मेलन की अल्पसंख्यक समिति की बैठक में घोषणा की थी, मैं आपके निर्णय के विरोध में अपने प्राणों का बलिदान कर दूंगा। ऐसा करने के लिए केवल एक रास्ता है कि मैं नमक और सोडा पानी के अतिरिक्त कुछ न लेकर आमरण अनशन करूं। यह अनशन तभी टूटेगा जब ब्रिटिश सरकार स्वयं कोई प्रस्ताव करेगी अथवा लोकमत के दबाव में आकर अपने फैसले पर पुनर्विचार करेगी और उन दलित वर्गों के लिए पृथक सांप्रदायिक प्रणाली के विचार को त्याग देगी। उनके प्रतिनिधि प्रस्तावित सामान्य निर्वाचन प्रणाली द्वारा चुने जाने चाहिए।

प्रस्तावित अनशन आम तौर से 20 सितम्बर के दोपहर से आरंभ होगा और तब तक चलता रहेगा जब तक कि ऊपर बताए गए तरीके पर सरकार के फैसले पर पुनर्विचार नहीं कर लिया जाता।

मैं अधिकारियों से कह रहा हूं कि इस पत्र को तार के जरिए आपको नोटिस के तौर पर भेज दूं। इस विषय में मैं आपको यह पत्र पहुंचाने के लिए काफी समय दे रहा हूं। मैं यह भी कहना चाहता हूं कि मेरा यह पत्र तथा सर सैमुअल होर को पहले लिखा गया पत्र दोनों शीघ्रातिशीघ्र प्रकाशित किए जाएं। मैंने अपनी ओर से ईमानदारी के साथ जेल के सभी नियमों का पालन किया है और उन दोनों पत्रों में जो कुछ लिखा गया था उसे सरदार वल्लभ भाई पटेल तथा श्री महादेव देसाई को छोड़ मैंने किसी को भी नहीं बतलाया है। मैं चाहता हूं कि जनता की राय जानने के लिए उन पत्रों को प्रकाशित किया जाए।

मुझे खेद है कि मैंने इस प्रकार का दुःखद निर्णय लिया। परंतु धार्मिक व्यक्ति होने के नाते मेरे पास अन्य कोई चारा नहीं था। जैसाकि मैंने सर सैमुअल होर को भेजे गए पत्र में कहा था, यदि ब्रिटिश सरकार अपने को परेशानी से बचाने के लिए मुझे जेल से मुक्त करने का फैसला लेती है, तब जेल से छूटने के बाद बाहर भी मेरी भूख हड़ताल जारी रहेगी, क्योंकि इस फैसले का प्रतिरोध करने के अलावा मेरे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। मैं जेल से बाइज्जत छूटने की अपेक्षा कोई अन्य विकल्प उठाना ठीक नहीं समझता हूं।

हो सकता है कि मेरा फैसला गलत हो और दलित वर्गों के पृथक मतदान के संबंध में मैं पूर्णतया गलती पर होऊ और ऐसा मतदान उनके और हिंदुओं के लिए हानिकारक हो। यदि ऐसा होगा तो मेरा जीवन दर्शन