96 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
दलित वर्गों के सभी लोग जिनके नाम उस निर्वाचन-क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज होंगे, एक निर्वाचन-मंडल में होंगे, जो प्रत्येक सुरक्षित सीट के लिए दलित वर्गों के चार अभ्यार्थियों का पैनल चुनेगा। वह चुनाव-पद्धति एकल मत प्रणाली के आधार पर होगी। ऐसे प्राथमिक चुनाव में जिन चार सदस्यों को सबसे अधिक मत मिलेंगे, वे सामान्य निर्वाचन के लिए उम्मीदवार माने जाएंगे।
केंद्रीय विधानमंडल में दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व उपरोक्त खंड 2 में उपबंधित रीति से संयुक्त निर्वाचन प्रणाली के सिद्धांत पर होगा और प्रांतीय विधानमंडलों में उनके प्रतिनिधित्व के लिए प्राथमिक निर्वाचन के तरीके द्वारा सीटों का आरक्षण होगा।
केंद्रीय विधानमंडल में अंग्रेजी राज के तहत सीटों में से दलित वर्गों के लिए सुरक्षित सीटों की संख्या 18 प्रतिशत होगी।
उम्मीदवारों के पैनल की प्राथमिक चुनाव व्यवस्था केंद्रीय तथा प्रांतीय विधानमंडलों के लिए जिनका ऊपर उल्लेख किया गया है प्रथम दस वर्ष के बाद समाप्त हो जाएगी। दोनों पक्षों की आपसी सहमति पर निम्नलिखित पैरा 6 के अनुसार इसे पहले भी समाप्त किया जा सकता है।
प्रांतीय तथा केंद्रीय विधानमंडलों में दलितों के लिए सीटों का प्रतिनिधित्व, जैसा कि ऊपर खंड 1 और 4 में दिया गया है, तब तक जारी रहेगा, जब तक कि दोनों संबंधित पक्षों में आपसी समझौते द्वारा उसे समाप्त करने पर सहमति नहीं हो जाती।
केंद्रीय तथा प्रांतीय विधानमंडलों के चुनाव के लिए दलितों को मतदान का अधिकार उसी प्रकार होगा जैसा लोथियन समिति की रिपोर्ट में कहा गया है।
दलित वर्गों के सदस्यों को स्थानीय निकायों के चुनावों तथा सरकारी नौकरियों में अस्पृश्य होने के आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा। दलितों के प्रतिनिधित्व को पूरा करने के लिए सभी तरह के प्रयत्न किए जाएंगे और सरकारी नौकरियों में उनकी नियुक्ति निर्धारित शैक्षिक योग्यता के अनुसार की जाएगी।
सभी प्रांतों में शैक्षिक अनुदान से उन दलितों के बच्चों को सुविधाएं प्रदान करने के लिए समुचित धनराशि नियत की जाएगी।