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तुच्छ चालें

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समझौते की शर्तें श्री गांधी ने मान लीं और उनको भारत सरकार के अधिनियम में शामिल कर लिया गया। पूना पैक्ट पर विभिन्न प्रक्रियाएं हुईं। अस्पृश्य दुःखी थे। ऐसा होना स्वाभाविक था। बहुत से लोग उस समझौते के पक्ष में नहीं हैं। वे यह जानते हैं कि यह सही है कि प्रधानमंत्री द्वारा कम्युनल अवार्ड में दी गई सीटों की अपेक्षा पूना पैक्ट में अस्पृश्यों को अधिक सीटें दी गई हैं। पूना पैक्ट से अस्पृश्यों को 148 सीटें मिली हैं, जबकि कम्युनल अवार्ड में 78 सीटें मिलनी थीं। परंतु इससे यह परिणाम निकालना कि कम्युनल अवार्ड की अपेक्षा पूना पैक्ट में बहुत कुछ अधिक दिया गया है, वास्तव में कम्युनल अवार्ड की उपेक्षा करना है क्योंकि कम्युनल अवार्ड ने भी अस्पृश्यों को बहुत कुछ दिया है।

कम्युनल अवार्ड से अस्पृश्यों को दो लाभ थे µ

  1. पृथक मतदाता प्रणाली द्वारा अस्पृश्यों को सीटों का निश्चित कोटा, जिन पर अस्पृश्य उम्मीदवारों को ही चुना जा सकता था।

  2. दोहरी मतदान सुविधा - वे एक वोट का उपयोग पृथक मतदान के तहत दे सकते थे और दूसरा आम चुनाव के समय देते।

अब यदि पूना पैक्ट ने सीटों का कोटा बढ़ा दिया गया है तो इसने दोहरे मत की सुविधा भी समाप्त कर दी है। सीटों की वृद्धि दोहरे मत की सुविधा की हानि की क्षतिपूर्ति कभी नहीं कर सकती। कम्युनल अवार्ड द्वारा दिया गया दोहरे मतदान का अधिकार अमूल्य एवं विशेष अधिकार था। यह एक राजनीतिक हथियार था, जिसकी बराबरी नहीं की जा सकती। प्रत्येक निर्वाचन-क्षेत्र में मतदान करने योग्य अस्पृश्यों की संख्या पूर्ण मतदान संख्या का दसवां भाग है। इस मतदान शक्ति से आम हिंदू उम्मीदवारों के चुनाव में अस्पृश्यों की स्थिति निर्णायक होती, चाहे साधिकार न भी हो। कोई भी सवर्ण हिंदू अपने निर्वाचन-क्षेत्र में अस्पृश्यों की उपेक्षा नहीं कर पाता और अस्पृश्यों को आंख दिखाने की स्थिति में भी न रहता। अस्पृश्यों के मतों पर निर्भर करता। आज अस्पृश्यों की कम्युनल अवार्ड की अपेक्षा कहीं अधिक सीटें मिली हैं। बस उन्हें यही मिला। प्रत्येक सदस्य यदि क्षुब्ध नहीं भी है, तो भी उदासीन है। यदि कम्युनल अवार्ड द्वारा दिया गया दोहरे मतदान का अधिकार बरकरार रहता, तो अस्पृश्यों को कुछ सीटें भले ही कम मिलतीं, परंतु प्रत्येक सदस्य अस्पृश्यों के लिए भी प्रतिनिधि होता। अस्पृश्यों के लिए अब सीटों की संख्या में की गई बढ़ोतरी कोई बढ़ोतरी नहीं है। इससे पृथक मतदान प्रणाली और दोहरे मतदान की क्षतिपूर्ति नहीं होती। हिंदुओं ने यद्यपि पूना पैक्ट पर खुशियां नहीं मनाईं, वे इसे पसंद नहीं करते। वे