98 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
इस अफरातफरी में श्री गांधी के प्राणों की रक्षा के लिए चिंतित थे। इस दौरान भावना की लहर चल रही थी कि श्री गांधी के प्राण बचाना महान कार्य है। इसलिए जब उन्होंने समझौते की शर्तें देखीं, तो वे उन्हें पसंद नहीं थीं, लेकिन उनमें उस समझौते को अस्वीकार करने का भ्ी साहस नहीं था। जिस समझौते को हिंदुओं ने पसंद नहीं किया और अस्पृश्य उसके विरोध में थे, पूना पैक्ट को दोनों पक्षों को स्वीकार करना पड़ा और उसे भारत सरकार के अधिनियम में शामिल कर लिया गया।
IX
पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर हो जाने के पश्चात् निर्वाचन-क्षेत्र निर्धारित करने के लिए हेमंड समिति नियुक्त की गई। उसका काम नए संविधान के अनुसार विधानसभाओं के लिए मतदान की व्यवस्था करना और निश्चित सीटों के लिए निर्वाचन-क्षेत्रों का निर्धारण करना था।
हेमंड समिति को पूना पैक्ट की शर्तों को ध्यान में रखते हुए कार्य करना था और चुनाव योजना में अस्पृश्यों की आवश्यकताओं को पूरा करना था। दुर्भाग्यवश पूना पैक्ट हड़बड़ी में तैयार हुआ था, इसलिए बहुत सी बातें परिभाषित नहीं हो पाईं। जो बातें अपरिभाषित रह गई थीं, उनमें से दो बहुत महत्वपूर्ण थींः (1) प्राथमिक चुनावों में कम से कम कितने सदस्यों का पैनल हो अथवा इससे कम का नहीं? (2) अंतिम चुनाव में मतदान का क्या सिद्धांत निर्धारित किया जाए? हिंदुओं की ओर से इस बात पर संतोष व्यक्त किया गया कि न्यूनतम चार का पैनल बने। यदि चार उम्मीदवार मैदान में नहीं आते, तो प्राथमिक चुनाव वैध नहीं होगा और इस प्रकार सुरक्षित सीट पर चुनाव नहीं हो सकता। इसके विषय में उन्होंने कहा कि ऐसे स्थानों को खाली पड़ा रहने दिया जाए और अस्पृश्यों का प्रतिनिधित्व न रहे। अस्पृश्यों की ओर से उस विवादग्रस्त मुद्दे की व्याख्या करने के लिए मुझे बुलाया गया। मैंने कहा कि पूना पैक्ट में चार का अर्थ है अधिकतम चार, न कि न्यूनतम चार। मतदान के प्रश्न पर हिंदुओं ने कहा कि अनिवार्य विभाजक मत का सिद्धांत उपयुक्त है। अस्पृश्यों की ओर से मैंने कहा कि मतों की एकत्रित व्यवस्था ही समुचित व्यवस्था रहेगी। सौभाग्यवश हेमंड समिति ने मेरे विचारों को स्वीकार कर लिया और हिंदुओं के तर्कों को रद्द कर दिया। यह दिलचस्प बात है कि सवर्ण हिंदुओं ने इस विषय में यह तर्क क्यों प्रस्तुत किया था? जरा सा ध्यान देने पर पता चल जाएगा। प्रश्न उठता है कि हिंदुओं ने हेमंड समिति के समक्ष यह खास विचार क्यों रखा? उस तर्क के पीछे उनका असल इरादा क्या था? मेरे विचार से हिंदुओं का इरादा था कि वैध प्राथमिक चुनाव में अस्पृश्यों के फ्कम से कम चारय् उम्मीदवारों के सिद्धांत की मांग स्वीकार होने पर सवर्ण