तुच्छ चालें
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टिकट पर अस्पृश्य अभ्यर्थी को खड़ा किया और उन सीटों पर, जो अस्पृश्यों के लिए सुरक्षित थीं, वित्तीय थैलियों के बल पर कांग्रेस ने अच्छा खासा लाभ कमाया।
गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट, 1935 के अंतर्गत अस्पृश्यों को 151 सीटें ख्1, सुरक्षित थीं। निम्न तालिका से स्पष्ट है कि कांग्रेस टिकट पर जो अस्पृश्य अभ्यर्थी थे, उन्हें कितनी अधिक सीटें प्राप्त हुईं -
| Col1 | rkfydk & 5 | Col3 |
|---|---|---|
oqQy lhVksa dh la[;k |
lhVsa izkIr dh |
|
| la;qDr izkar eækl caxky eè; izkar cEcbZ fcgkj iatkc vle mM+hlk |
20 30 30 20 15 15 08 07 06 |
16 26 06 07 04 11 00 04 04 |
इससे स्पष्ट है कि अस्पृश्यों के लिए कुल सुरक्षित सीटों की लगभग 51 प्रतिशत सीटें कांग्रेस ने ले लीं। कांग्रेस ने 78 सीटें प्राप्त कर केवल 73 सीटें अस्पृश्यों के सही और स्वतंत्र प्रतिनिधियों के लिए छोड़ी। कम्युनल अवार्ड में उन अस्पृश्यों ने, जो कुछ प्राप्त किया था, पूना पैक्ट में बहुत कुछ गंवा दिया। प्रभावकारी प्रतिनिधित्व की दृष्टि से कम्युनल अवार्ड की अपेक्षा बहुत कम लाभ हुआ जबकि कांग्रेस को पूना पैक्ट से बहुत लाभ हुआ। यद्यपि पूना पैक्ट में दलितों को 151 सीटें दी गई थीं परंतु 78 कांग्रेस डकार गई जिससे कांग्रेस को अच्छा खासा लाभ हुआ। यह हानि 1937 के चुनाव ने अस्पृश्यों को पहुंचाई। यह कांग्रेस का अस्पृश्यों के मुंह पर दूसरा सबसे जोरदार और करारा तमाचा था। इससे उन्हें कार्यपालिका में स्थान पाने से वंचित कर दिया गया।
- बिहार और उड़ीसा में सीटों के ठीक निश्चय करने में तीन सीटों के बढ़ जाने के कारण 148 से 151
हो गईं।