102 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मैं आरंभ से ही गोलमेज सम्मेलन में बहस के दौरान इस बात पर बल देता रहा हूं कि अस्पृश्यों को केवल व्यवस्थापिकाओं में ही अपने प्रतिनिधि भेजने का अधिकार न मिले, अपितु उन्हें मंत्रिमंडल में भी प्रतिनिधित्व का अधिकार मिले। अस्पृश्यों की परेशानी केवल कानूनों के कारण ही नहीं, वरन शासन में अस्पृश्यों के विरुद्ध प्राचीन काल से चले आ रहे पूर्वाग्रह के कारण भी है। जब तक सार्वजनिक सेवाओं में हिंदुओं का प्रभुत्व रहेगा तब तक अस्पृश्य लोग पुलिस से कभी सुरक्षा की आशा नहीं कर सकते, न्यायपालिका से भी न्याय की आशा नहीं कर सकते और वे प्रशासन से भी कुछ नहीं पा सकते। सार्वजनिक सेवाओं में कू्ररता से अस्पृश्यों को तभी मुक्ति मिल सकती है, जब कार्यकारी पदों पर अस्पृश्यों की नियुक्ति की जाए। गोलमेज सम्मेलन में मैंने इसी बात पर बल दिया था कि मंत्रिमंडल में उन्हें प्रतिनिधित्व को स्वीकार किया जाए, ठीक उसी प्रभावी ढंग से जैसा कि व्यवस्थापिकाओं में उनके प्रतिनिधित्व के अधिकार दिए जाएंगे। गोलमेज सम्मेलन ने इस दावे की वैधता को मान लिया था और उन्हें लागू करने के तरीके भी खोज लिए थे। उस प्रस्ताव को प्रभावी ढंग से लागू करने के दो तरीके थे। प्रथम यह था कि भारत सरकार के अधिनियम में कानूनसम्मत ऐसा उपबंध किया जाए कि उस कानूनी दायरे से बचना असंभव हो। दूसरा तरीका यह था कि कानूनसम्मत प्रावधान न होकर इंसानियत और भलमनसाहत से मामला आम सहमति पर छोड़ दिया जाए, जैसा कि प्रथा के अनुसार इंग्लैंड के संविधान में प्रावधान है। मैंने तथा अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधियों ने कुछ प्रमुख भारतीयों की इच्छानुसार देशवासियों से दूसरे तरीके पर कोई जोर नहीं दिया और इसलिए मध्यम मार्ग पर सहमति हो गई। गवर्नरों के लिए जो निर्देश जारी होने थे और उनमें एक यह धारा जोड़ी जाने वाली थी कि उन्हें इस बात का ध्यान रखना होगा कि मंत्रिमंडल का गठन करते समय उसमें अल्पसंख्यंकों का प्रतिनिधित्व अवश्य हो। नियम इस प्रकार था -
फ्मंत्रिमंडल का गठन करते समय गवर्नर गवर्नर निम्नलिखित तरीके से मंत्रिमंडल
गठित करने का भरसक प्रयत्न करेगा - वह ऐसे व्यक्ति के परामर्श से जिसे
विधान-मंडल में स्थिर बहुमत प्राप्त हो, उन व्यक्तियों को नियुक्त करेगा
(जिनमें जहां तक व्यवहार्य हो, महत्वपूर्ण समुदायों के अल्पसंख्यक सदस्य
भी सम्मिलित होंगे) जिन्हें विधान-मंडल का सामूहिक विश्वास प्राप्त होगा।
ऐसा करते हुए वह इस प्रकार मंत्रिमंडल का गठन करेगा कि उनमें मंत्रियों
में सामूहिक दायित्व वहन करने की भावना हो।य्
इस व्यवस्था का क्या हुआ इसकी भी एक दिलचस्प कहानी है। कांग्रेस ने घोषणा की कि वे विभिन्न कारणों से जिनका उल्लेख आवश्यक नहीं, भारत सरकार के