4. घृणित समर्पण - Page 127

112 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

फ्हरिजनय् जुलाई 15, 1933 में

फ्वीक टू वीकय्

शैक्षिक सुविधाएं

नॉर्थ आर्कट जिले में एस.यू.एस. द्वारा हरिजनों के लिए तीन वाचनालय खोले गए।

एस.यू.एस. वर्क्स ने मदुरै जिले में हरिजन बच्चों को विरगनूर तालुक बोर्ड स्कूल में भरती कराया।

मथुरा के एस.यू.एस. द्वारा संचालित मेलाचेरी स्कूल में बच्चों को बनियानें, तौलिए, सलेटें आदि निःशुल्क बांटी।

रामजस कॉलेज, दिल्ली के दो हरिजन विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और निःशुल्क आवास सुविधा दी गई। एक को कॉलेज के आचार्य थडानी ने छात्रवृत्ति दी।

मोची गेट के बाहरी क्वार्टरों में लाहौर हरिजन सेवक संघ के तत्त्वावधान में हरिजन वयस्कों के लिए रात्रि स्कूल खोला गया। उसका उदघाटन श्रीमती बृजलाल नेहरू ने किया था।

जिला हरिजन सेवक संघ, गुंटूर के प्रयत्नों से हरिजन छात्रों को सवर्ण हिंदुओं के स्कूलों में पढ़ने की इजाजत दी गई।

कुएं

कोयम्बतूर जिले में तीन कुएं साफ किए गए जो खराब हालत में पड़े हुए थे और उपयोग करने योग्य बनाए गए।

दक्षिण आर्कट के डिस्ट्रिक्ट बोर्ड प्रेसिडेंट ने एस.यू.एस. द्वारा चुने गए चार कुएं

खुदवाने का वायदा किया।

31.5.33 के अंतिम सप्ताह में 125 कुएं से अधिक हरिजनों के लिए खोले गए और आंध्र प्रदेश में पांच नए कुएं बनवाए गए।

सामान्य

कलकत्ता में हाग मार्केट में, जहां डोम रहते हैं, एक दुकान खोली गई।

वहां खाने की वस्तुएं सस्ते दामों पर दी जाती हैं।

कलकत्ता में बीबी बेगम बस्ती में एक हरिजन परिवार का ऋण चुकाने के लिए एस.यू.एस. बंगाल द्वारा 60 रुपए दिए गए।