114 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
लिए विवश किया गया। गुरूवयूर के मंदिर में अछूतों के प्रवेश हेतु श्री केलप्पन ने सत्याग्रह का नेतृत्व किया था, जो मंदिर प्रवेश आंदोलन का एक भाग था। आंदोलन की लहर को रोकने के लिए मंदिरों के न्यासियों के हाथ मजबूत करने के लिए बहुत से हिंदू विधायक एक के बाद एक आगे आए और अस्पृश्यों के मंदिर प्रवेश के समर्थन में आगे आए। यदि जनमतसंग्रह कराया जाता, तो अधिकांश हिंदू पुजारियों के पक्ष में रहते। ऐसे विधायकों की झड़ी कम की गई, हर विधायक आगे रहना चाहता था। मद्रास विधान परिषद के एक सदस्य डॉक्टर सुब्बारायन ने केंद्रीय सभा में मंदिर प्रवेश का विधेयक पेश किया था। इसी प्रकार एक विधेयक श्री सी.एस. रंगा अय्यर, दूसरा श्री हरिबिलास शारदा, तीसरा श्री लालचंद नवलरराय और चौथा विधेयक श्री एम.आर. जयकर ने पेश किया था।
इस आंदोलन में श्री गांधी ने भी भाग लिया। 1932 से पहले श्री गांधी अस्पृश्यों के हिंदू मंदिरों में प्रवेश करने के सर्वथा विरुद्ध थे। श्री गांधी के शब्दों में ही ख्1, -
फ्यह कैसे संभव हो सकता है कि अन्त्यज (अस्पृश्य) के पास सभी वर्तमान
हिंदू मंदिरों में प्रवेश करने के अधिकार हों? जब तक वर्णाश्रम विद्यमान है,
हिंदू धर्म और हिंदू ग्रंथों को प्रमुख स्थान मिला हुआ है। यह कहना कि
प्रत्येक व्यक्ति हिंदू मंदिर में प्रवेश कर सकता है, आजकल असंभव है।य्
इसलिए श्री गांधी द्वारा मंदिर प्रवेश के आंदोलन में भाग लेना बड़े आश्चर्य की बात है। श्री गांधी ने ऐसी पलटी क्यों खाई यह कल्पना से बाहर की बात है? क्या सचमुच उनका हृदय-परिवर्तन हो गया था? और वह भी इसलिए कि हिंदुओं के मंदिरों में अस्पृश्यों के प्रवेश करने का विरोध कर उन्होंने गलती की थी? क्या हिंदुओं और अस्पृश्यों के बीच में राजनीति के दुराव के कारण ही पूना पैक्ट हुआ था? उन्हें लगा कहीं पूरा विभाजन न हो जाए? इसलिए श्री गांधी की आंखें
खुलीं और उन्होंने दोनों वर्गों को सांस्कृतिक और धार्मिक बंधन में बांधने के लिए मंदिर-प्रवेश जैसा मार्ग अपनाया। अथवा मंदिर प्रवेश आंदोलन में उनका सम्मिलित होने का उद्देश्य अस्पृश्यों के लिए राजनीतिक अधिकारों के दावे को कमजोर करना और अस्पृश्यों तथा हिंदुओं के बीच अलगाव वाली दीवार को तोड़ना था। इस आंदोलन के द्वारा अस्पृश्यों का पृथक अस्तित्व समाप्त कर दिया जाए या उन्होंने लोकेषणावश वाहवाही लूटने की अपनी आदत के कारण किया।? दूसरा और तीसरा कारण सही हो सकता है।
- गांधी शिक्षण, भाग दो, पृष्ठ 132