4. घृणित समर्पण - Page 135

120 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

नीच समझे जाते रहेंगे। दलित वर्ग के लोग कह सकते हैं कि वे हिंदू तभी

हैं, जब चातुर्वर्ण्य और जाति व्यवस्था को दफन कर दिया जाए और हिंदू

शास्त्रों से उस व्यवस्था को बिल्कुल हटा दिया जाए। क्या महात्मा गांधी और

समाज सुधारक इसे अपना लक्ष्य बनाकर चल सकते हैं और इसके लिए कुछ

कार्य करने का साहस करेंगे? मैं इस विषय में अपना विचार अंतिम रूप से

निश्चित करने से पहले भविष्य में उनकी घोषणा की प्रतीक्षा करूंगा। परंतु

श्री गांधी और हिंदू चाहे इसके लिए तैयार हों अथवा नहीं एक बार ही यह

सबको मालूम हो जाना चाहिए कि इससे कम में दलित वर्ग संतुष्ट नहीं होंगे

और तभी वे मंदिर प्रवेश को स्वीकार करेंगे। मंदिर प्रवेश को स्वीकार कर

लेना और उससे संतुष्ट हो जाना पाप के साथ समझौता करने और मानवता

की पवित्रता का ही सौदा करने के समान होगा।

मैंने जो नीति अपनाई है, उसके विरुद्ध श्री गांधी और हिंदू सुधारक एक

तर्क प्रस्तुत कर सकते हैं। वे कह सकते हैं कि दलित वर्गों द्वारा मंदिर प्रवेश

स्वीकार कर लेने से चातुर्वर्ण्य और जाति व्यवस्था के विरुद्ध आंदोलन करने से

उन्हें कोई नहीं रोकता। यदि ऐसा उनका विचार है, तो मैं इस तर्क का अभी

सीधे सामना करने को तैयार हूं और भविष्य में प्रगति के मार्ग को साफ कर

देना चाहता हूं। मेरा उत्तर यह है कि यह सच्चाई है कि यदि मैं इस समय मंदिर

प्रवेश स्वीकार कर लूं, तो चातुर्वर्ण्य और जाति व्यवस्था को समाप्त करने के

लिए आंदोलन करने का हमारा अधिकारा समाप्त नहीं हो जाएगा। परंतु जब यह

प्रश्न सामने आएगा, तब श्री गांधी कहां होंगे? यदि वे मेरे विरोधियों के खेमे

में होंगे, तो मैं बतला देना चाहता हूं कि मैं अब उनके साथ नहीं हो सकता।

यदि वह मेरे साथ होंगे तो उन्हें अभी से मेरे साथ आ जाना चाहिए।य्

दीवान बहादुर आर. श्रीनिवासन ने भी जिन्होंने गोलमेज सम्मेलन में मेरे साथ अस्पृश्यों का प्रतिनिधित्व किया था, मंदिर प्रवेश का समर्थन नहीं किया। उन्होंने प्रेस को अपने बयान में कहा था -

फ्जब किसी दलित वर्ग के सदस्य को मंदिर में प्रवेश को अनुमति दी

जाएगी, तब उसे चारों वर्णों में से किसी में भी नहीं गिना जाएगा। वरन् उसे

पचंम वर्ण का कहा जाएगा, जो अंतिम और निम्न वर्ग समझा जाता है। यह

कहलाने में भी गहरा कलंक है। तब उस पर अनेक धार्मिक प्रतिबंध लग

जाएंगे और उसे घोर अपमान सहना होगा। दलित वर्ग के लोग इस प्रकार से

प्रवेश करने वालों का हुक्का-पानी बंद कर देंगे। दलित वर्ग के करोड़ों लोग