4. घृणित समर्पण - Page 138

घृणित समर्पण

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उसका अध्याय समाप्त हो गया। गुरूवयूर मंदिर सत्याग्रह के विषय में और मंदिर प्रवेश के विधेयक के संबंध में भी ऐसा ही हुआ। ये वे घटनाएं हैं, जिनका यह संक्षेप में इतिहास है। इनमें श्री गांधी और कांग्रेसियों की सच्ची भावनाएं झलकती हैं।

IV

गुरूवयूर मंदिर सत्याग्रह कैसे आरंभ हुआ? मालाबार में पोन्नानि तालुक में गुरूवयूर में कृष्ण का एक मंदिर है। कालीकट का जमोरिन उस मंदिर का न्यासी है। एक हिंदू जिसका नाम केलप्पन था, मालाबार में अस्पृश्यों के लिए कार्य कर रहा था। उसने उस मंदिर में अस्पृश्यों के प्रवेश करने के लिए आंदोलन आरंभ किया। कालीकट के जमोरिन ने, जो उस मंदिर का न्यासी था, अस्पृश्यों के प्रवेश के लिए मन्दिर खोलने से इंकार किया और अपने बचाव में हिंदू धर्म दाय अधिनियम की धारा 40 का सहारा लिया, जिसके अनुसार मंदिरों के विषय में चली आ रही परंपरा और रीतिरिवाज के विरुद्ध कोई भी न्यासी कुछ नहीं कर सकता था। 20 सितंबर, 1932 को श्री केलप्पन ने सामने धूप में बैठकर भूख हड़ताल शुरू कर दी। जमोरिन ने उस फजीहत और कठिनाई से छुटकारा पाने के लिए गांधी जी से अपील की कि वह केलप्पन को कुछ समय तक अनशन स्थगित करने के लिए कहें। श्री गांधी के अनुरोध पर केलप्पन ने दस दिन अनशन करने के बाद अक्तूबर 1, 1932 को तीन महीने के लिए अपना अनशन स्थगित कर दिया। जमोरिन ने कुछ नहीं किया। श्री गांधी ने उसे एक तार भेजते हुए कहा कि वह कानूनी अथवा अन्य कठिनाइयों को दूर करें। श्री गांधी ने जमोरिन को भी कहा कि श्री केलप्पन ने उनके अनुरोध पर अनशन स्थगित किया था। इसलिए अस्पृश्यों को मंदिर प्रवेश का अधिकार दिलाने के लिए वह जिम्मेदार हो गए हैं। नवंबर 5, 1932 को श्री गांधी ने प्रेस को निम्नलिखित बयान छपने के लिए दिया µ

फ्केरल के गुरूवयूर मंदिर में प्रवेश के लिए यह दूसरा अनशन होने वाला

है। श्री केलप्पन ने मेरे तात्कालिक अनुरोध पर तीन महीने के लिए अनशन

स्थगित किया था। वह अनशन उन्हें मौत के दरवाजे तक ले जाने वाला था।

यदि जनवरी 1, 1933 तक अथवा उसके पहले अस्पृश्यों के लिए उन्हीं

शर्तों पर मंदिर नहीं खोला गया, जिन शर्तों पर सवर्णों के लिए खुला है तो

मुझे विवश होकर श्री केलप्पन के साथ ही अनशन करना पड़ेगा।य्

जमोरिन ने इसे मानने से इंकार कर दिया और उपरोक्त बयान के जवाब में प्रेस को निम्नांकित बयान छपने के लिए भेजा µ

फ्अस्पृश्य लोगों के लिए मंदिर प्रवेश की तरह-तरह की अपीलें की जा रही