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घृणित समर्पण

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इस प्रकार गुरूवयूर मंदिर का अध्यय समाप्त हुआ। अब मैं दूसरी योजना पर आता हूं, जो मंदिर प्रवेश का कानून बनाने के विषय में है। बहुत से विधेयकों में से केंद्रीय सभा में श्री रंगा अय्यर द्वारा लाए गए विधेयक पर विचार किया गया। अन्य सभी विधेयक रोक दिए गए। विधेयक के आरंभ में ही तूफान खड़ा हो गया। गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एकट के अनुसार कोई भी विधेयक जिससे धर्म, परंपरा और प्रचलित प्रथाएं प्रभावित होती हों, सदन में उस समय तक पेश नहीं किया जा सकता, जब तक उस पर वायसराय की पूर्व अनुमति न ले ली जाए। जब इस प्रकार की अनुमति के लिए विधेयक वायसराय के पास भेजा गया, तब यह खबर उड़ा दी गई कि वायसराय विधेयक पर अनुमति देने से इंकार कर रहे हैं और इस प्रकार एक हंगामा खड़ा हो गया। श्री गांधी ऐसी खबरों से उत्तेजित हो उठे और उन्होंने 21 जनवरी, 1933 को प्रेस को छपने के लिए इस प्रकार बयान दिया -

फ्यदि वायसराय के फैसले के बारे में पहले ही जानकारी है, तो मैं कहूंगा

कि यह बहुत बड़ी दुःखद बात है। मैं स्पष्टतः इस मत को अस्वीकार करता

हूं कि इन बातों के पीछे कोई राजनीतिक इरादा है। यदि न्यायालय के फैसलों

से संदेहास्पद प्रथाएं कानूनी रूप धारण न कर लेतीं तो किसी विधेयक की

कोई आवश्यकता नहीं थी। मैं स्वयं राज्य द्वारा धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप

को एक असहनीय दोष मानता हूं। परंतु यहां पर विधेयक कानूनी अड़चन

को दूर करने के लिए लोकप्रिय मुद्दों पर आधारित होने के कारण नितांत

आवश्यक हो गया है। जहां तक मैं समझता हूं, दलों के बीच परस्पर विरोधी

विचार होते हुए भी टकराव का कोई प्रश्न नहीं उठता।य्

सरकार का फैसला 23 जनवरी, 1933 को घोषित किया गया। लॉर्ड विलिंगटन ने मद्रास कौंसिल में डॉ. सुब्बारायन के मंदिर प्रवेश विधेयक पर स्वीकृति देने सं इंकार कर दिया। परंतु उन्होंने मद्रास असेंबली में श्री रंगा अय्यर को अस्पृश्यता निवारण विधेयक के पेश करने की अनुमति दे दी। यह तय करने के लिए कि क्या रुख अपनाना चाहिए, पहले सरकार ने हिंदुओं के विचार जानने की आवश्यकता पर बल दिया। घोषणा में आगे कहा गया कि गवर्नर जनरल और भारत सरकार ने यह स्पष्ट कर देने की इच्छा की है कि यह आवश्यक है कि किसी ऐसी बात पर विचार तब तक न किया जाए, जब तक कि प्रस्तावों के प्रत्येक पहलू की पूरी तरह जांच न कर ली जाए। यह जांच केवल असेंबली में ही नहीं, वरन् उसके बाहर उन लोगों से भी हो, जो इससे प्रभावित होंगे। यह शर्त तभी पूरी हो सकती है जब उस विधेयक