4. घृणित समर्पण - Page 145

130 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

आया। मैंने कहा फ्मैं जानता हूं कि मालाबार में सुधारक बहुमत में नहीं हैं।य् सुधारक कहीं पर भी बहुमत में नहीं हैं, परंतु वे बहुमत को अपने पक्ष में रखकर विश्वास रखते हैं। तब मैंने कहा कि मालाबार में गुरूवयूर मंदिर के संबंध में कांग्रेसियों ने जो जनमतसंग्रह कराया उसका कोई भी परिणाम हो सकता है। मैं बिल्कुल विश्वास नहीं करता कि मालाबार में मंदिर में जाने वालों का बहुमत मंदिरों में अस्पृश्यों के प्रवेश के पक्ष में था। परंतु मैं उनके पक्ष में लड़ने के लिए तैयार था, उसके पक्ष में तर्क-वितर्क करने के लिए तैयार था। उन्हें मनाने और उन्हीं के हित में उन्हें तैयार करने के पक्ष में था, क्योंकि मैं समझता हूं कि अस्पृश्य मेरे ही समाज का अंग हैं। महोदय, यदि मेरे समाज के एक तिहाई भाग को धर्म के नाम पर बहिष्कृत हुआ पड़ा रहना है, तो मैं समझता हूं कि ऐसे समाज को जीवित रहने का ही अधिकार नहीं है। यह इस विचार से कि हिंदू जाति संगठित हो, इस विचार से भी कि भविष्य में हिंदू जाति का उत्थान हो, जैसा कि उसका अतीत रहा है, जब वैदिक काल में अस्पृश्यता नाम की कोई चीज नहीं थी, मैं उनके हक के लिए लड़ रहा हूं। अब मैं समझता हूं कि जो कांग्रेसी कल अस्पृश्यता के संबंध में जितने उत्सुक थे, आज उतने ही उदासीन हैं। श्री राजगोपालाचारी ने किस प्रकार मंदिर प्रवेश विधेयक की अर्थी पर रस्सी लपेट दी, जैसा कि राज बहादुर कृष्णमचारी, कोलेगोंड के राजा साहेब और सर सत्य चरण मुखर्जी, जो देश में सनातनी हिंदुओं का प्रतिनिधित्व करते हैं भी सम्भवतः यह कहना पसन्द करेंगेः

फ्महोदय! श्री राजगोपालाचारी कहते फिरते हैं कि अब और कोई मुद्दा नहीं है। इसका अर्थ यही है कि मंदिर-प्रवेश का मुद्दा नहीं वरन् राजनीति, अंग्रेज भय की बात, ब्रिटिश विरोधी बात, उनका मुद्दा है, क्योंकि उन्होंने जन भावनाओं को भुनाकर उसे जातीय जामा पहना दिया है। वे अहिंसा और धर्म की दुहाई देते हैं, क्योंकि अहिंसा को धार्मिक रंग दे दिया जाता है। देश में अविश्वास का वातावरण फैला दिया गया है। वे सोचते हैं कि अस्पृश्यता विरोध के नाम व्यापक मुद्दा उठाने पर शायद परिस्थितियां सहायक नहीं हो सकतीं। उन्होंने मुद्दे बदल डाले। वे अपने वचन से फिर गए। वे गुलाम हैं जो दो तीन आदमियों के साथ सच्चाई पर चलने से डरते हैं।

फ्तब श्री गांधी के प्रमुख सिपहसालार राजगोपालाचारी ने आगे और कहाः ‘यदि चुनाव में सफलता मिल जाती है, तो वे इस बात में विश्वास नहीं करेंगे कि किसी अन्य प्रश्न पर जनता की राय मालूम की जाए।