142 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
समस्या समाप्त हो जाएगी। बम्बई के एक रईस व्यापारी ने घुसपैठिए को यह
कहकर चुप कर दिया कि ‘तुमने उनसे भीतरी बात कही है, उनमें से कोई
भी उस सत्य को अंगीकार करने के लिए तैयार नहीं है।’ पहली बात से मुझे
ज्ञात होता है कि यह हरिजन सेवक संघ की मूलभूत कमजोरी रही है। परिणाम
क्या हुआ? संघ का प्रत्येक लाभार्थी डॉ. अम्बेडकर का कट्टठ्ठर अनुयायी है,
जो इस बात का परिचायक है कि हिंदुओं के प्रति डॉ. अम्बेडकर की तरह
उनका मन भी घृणा से भरा हुआ है। इस बयान की पुष्टि में मैं कई उदाहरण
दे सकता हूं, परंतु उससे बात बिगड़ेगी। मैं समझता हूं कि समस्त महत्वपूर्ण
निकायों में चाहे वे स्थानीय हों अथवा केंद्रीय, हरिजन पुरुषों और महिलाओं
को अन्य हिंदुओं के साथ मिलाने से उस घृणा भाव से बचा जा सकता
है। हरिजनों से घुले-मिले बिना उनकी सहायता करने का विचार सामाजिक
सुधार की भावना के विपरीत है। हरिजनों के उत्थान से संबंधित पहले के
आंदोलनों से मैं संबद्ध था। मैंने उन पुरुषों और महिलाओं में कभी शत्रु भाव
अनुभव नहीं किया। ऐसा इसलिए कि आंदोलन को खड़ा करने वाले धार्मिक
विश्वास सामाजिक अभिशाप को दूर करने के लिए कटिबद्ध थे और दलित
वर्गों के साथ उनका व्यवहार भेदभावपूर्ण नहीं था। मैं समझता हूं कि श्री
गांधी का यह कथन ठीक नहीं था अनुसूचित जातियों के लोग हरिजन सेवक
संघ में नहीं शामिल किए जा सकते। एक मित्र ने मुझे बताया था कि जब
संघ बना था, डॉ. अम्बेडकर उसके एक सदस्य थे।य्
मैंने यह उद्धरण इसलिए प्रस्तुत किया है कि इससे मुझे संघ के क्षोभ
के कारणों तथा उसके वास्तविक स्वरूप को स्पष्ट करने का अवसर
मिलता है।
III
फ्इंडियन सोशल रिफॉर्मरय् में लेखक ने दलील दी कि अस्पृश्यों को संघ के प्रबंध में शामिल किया जाना चाहिए। उनके बयान से शायद लोगों को विश्वास हो जाए कि अस्पृश्यों को संघ के केंद्रीय बोर्ड में कभी भी प्रतिनिधित्व नहीं मिला। ऐसा सोचना भूल होगी। वास्तविक स्थिति यह है कि आरंभ में संघ के केंद्रीय बोर्ड में कुछ प्रमुख अस्पृश्य प्रतिनिधि थे। श्री बिड़ला और श्री ठक्कर ने 3 नवंबर, 1932 को, जो बयान जारी किया उससे जो केंद्रीय बोर्ड के सदस्यों को उनके नाम दिए हुए हैं, उस केंद्रीय बोर्ड में निम्नलिखित सदस्य हैं µ