5. राजनीतिक दान - Page 164

राजनीतिक दान

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की भांति अस्पृश्यों के लिए लड़ने को वैसे ही तैयार हैं, जैसे कि उत्तर के गोरों ने अपने प्रियजनों के लिए लड़ाई लड़ी। जब दक्षिणी के गोरों ने नीग्रों की मुक्ति के लिए कमर कस के लड़ाई लड़ी थी, परंतु इस बात के साथ यह भी आवश्यक है कि लीग हिंदू जनता को अछूतों और सवर्ण हिंदुओं के बीच सामाजिक सहचर्य की आवश्यकता समझाए, जैसा कि मैंने ऊपर स्पष्ट किया है।

4. नियुक्त की जाने वाली एजेंसी

संघ को अपने कार्यक्रम का संचालन करने के लिए बड़ी संख्या में स्वयंसेवक तैयार करने होंगे। सामाजिक कार्यकर्ताओं का गठन कुछ लोगों की दृष्टि में बहुत छोटी सी बात हो सकती है। मैं इस कार्य के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं के संगठन के चुनाव को बहुत महत्वपूर्ण समझता हूं। सामाजिक कार्यकर्ताओं को यदि वेतन दिया जाएगा, तो वे विशेषतया उसी काम को करेंगे, जिसके लिए उन्हें रखा जाता है। मुझे विश्वास है कि ऐसे भाड़े के कार्यकर्ताओं से लीग का उद्देश्य पूरा न होगा। जैसा कि टाल्सटायने कहा था फ्केवल वे जो प्रेम करते हैं, वे ही सेवा कर सकते हैं।य् मेरे विचार से दलित वर्गों से ही लिए गए कार्यकर्ता इस कसौटी पर अधिक खरे उतरेंगे। इसलिए लीग इस प्रश्न को अपने दिमाग में रखकर निश्चय करे कि किन्हें कार्यकर्ता चुनना है? मैं यह नहीं कहता कि दलितों में बदमाश नहीं हैं, जो कुछ काम न कर पाने पर स्वार्थवश सामाजिक सेवा का धंधा अपनाते हैं। परंतु यह निश्चय है और आप भी देखेंगे कि दलित वर्गों से लिए गए कार्यकर्ता सफलतापूर्वक कितने प्रेम और लगन से लीग का काम करते हैं। लीग को इसी की जरूरत है। दूसरी बात यह है कि कुछ संस्थाएं बिना किसी निश्चित दायरे के ऐसी समाज-सेवा कर रही हैं। उनकी भी सेवाएं अस्पृश्यता निवारण लीग कुछ अनुदान देकर प्राप्त कर सकती है। परंतु मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि भाड़े पर कार्य करने की ऐसी व्यवस्था से कोई अच्छा परिणाम निकलने वाला नहीं है। वास्तव में लीग को ऐसे लोगों की आवश्यकता है कि जो एकाग्रचित होकर कार्य करें। मैं ऐसे व्यक्तियों और संस्थाओं को ही ऐसा कार्य करने के लिए चुनना पसंद करूंगा, जो समाज के हित में दीवानगी की हद तक कार्य करें। समाज का महत्वपूर्ण कार्य ऐसे व्यक्तियों को सौंपा जाए, जो मात्र दलित वर्गों की सेवा के लिए अपने आपको समर्पित करने को तैयार हों।