2 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
भावनाओं को ठेस पहुंचाए बिना तथा श्रेष्ठ धार्मिक परंपराओं को निभाते हुए कांग्रेस को आपसे, मुझसे और अन्य लोगों से यह कहने का अधिकार है कि दलितों के लिए स्कूलों में प्रवेश संबंध सभी प्रतिबंध हटाए जाएं। कांग्रेस सभी इन्सानों से यह अपेक्षा करती है कि देश के उन अधिकांश भागों में, जहां उन्हें सार्वजनिक कुओं से पानी नहीं भरने दिया जाता है, ऐसे प्रतिबंध हटाए जाएं। हमें स्वयं को प्रगतिशील बनाने तथा ऐसे कष्टकर प्रतिबंधों को समाप्त करने के लिए भारत के जनमानस में चेतना लानी होगी और जब हमें उत्तरदायी स्वायत्त सरकार प्राप्त होगी तब हम यह कहने की स्थिति में होंगे कि भारत के सभी वर्गों को, सभी मतावलंबियों को समान सामाजिक अधिकार प्राप्त हैं, सभी को स्कूलों और संस्थाओं में प्रवेश पाने का पूरा अधिकार प्राप्त है ताकि भारत का जनमानस अपने सच्चे गौरवशाली रूप में अपना विकास करे और अपनी परंपराओं पर गर्व करे।य्
श्री भूलाभाई देसाई ने प्रस्ताव के समर्थन में कहा µ
जिन अयोग्यताओं से हमारो कुछ भाई कष्ट उठा रहे हैं, वे अत्याचार हमारी समानता और बंधुत्व, जिसका हम दम भरते हैं, पर कुठाराघात है। बढ़ चढ़ कर हमने आज सवेरे जिस प्रस्ताव को पास किया है, यदि उसके अनुरूप हम अपने भाइयों का उत्थान करने में असफल रहे तो हम ब्रिटिश लोकतंत्र या अन्य शक्ति को क्या मुंह दिखाएंगे? वे कहेंगे, फ्तुम्हारा क्या असर है, तुम्हारे वर्ग में सामाजिक ऊंच-नीच का भेदभाव है जिसे तुम दूर नहीं कर सके।य् यह काम हमें स्वयं अपने आप करना है और इस मामले में हमें किसी बाहरी शक्ति की सहायता की आवश्यकता नहीं है। इससे उस महान अगले कदम को उठाए जाने की आवश्यकता की पुष्टि हो जाती है जो कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को आपके सम्मुख प्रस्तुत करके उठाया है। इस विषबेल का अस्तित्व हिंदू धर्म के लिए अपमानजनक है। इसलिए समय की पुकार न्याय और सत्य के आधार पर उन्हें उस सब से कैसे वंचित कर सकता है जिनके लिए इस प्रस्ताव में मांग की गई है और जबकि न्याय आप ही के हाथों में है और यदि आप ऐसा करने में असमर्थ हैं तब आप किस न्याय और किस मुंह से स्वराज्य की मांग कर सकते हैं?य्
श्री रामा अय्यर ने कहा µ
फ्इस प्रस्ताव में उस सामाजिक स्वतंत्रता का आह्वान किया गया है जिससे हम उन बेडि़यों को तोड़ देंगे जो उन पददलित वर्ग के लोगों को बांधे हुए