एक झूठा दावा
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(3) चुनाव का परिणाम मतदान के बहुमत के आधार पर निश्चित
किया जाता है।
- संयुक्त चुनाव पृथक चुनाव तथा सामान्य चुनाव प्रणाली के मध्य की तीसरी प्रणाली है। इसमें पृथक निर्वाचन तथा सामान्य निर्वाचन की कुछ-कुछ सामान्य बातें मिलती हैं। परंतु अन्य कुछ मुख्य बातें दोनों पद्धतियों में भिन्न हैं, सामान्य प्रचलित और भिन्न बातें निम्न प्रकार हैं -
(एक) संयुक्त निर्वाचन की तुलना पृथक निर्वाचन सेः
(1) संयुक्त निर्वाचन तथा पृथक निर्वाचन दोनों एक समान हैं तथा दोनों
का उद्देश्य किसी संप्रदाय विशेष के लिए सीट निश्चित करना है।
(2) संयुक्त निर्वाचन पृथक निर्वाचन से दो बातों में भिन्न है -
(क) पृथक निर्वाचन में चुनाव में मतदान का अधिकार उस संप्रदाय
के मतदाताओं तक सीमित रहता है, जिसके लिए वह सीट निश्चित रहती
है जबकि संयुक्त निर्वाचन में यद्यपि किसी संप्रदाय विशेष के सदस्य को
प्रत्याशी के रूप में खड़े होने का अधिकार होता है। सामान्य चुनाव की तरह
अन्य सभी संप्रदायों के मतदाताओं को भी मतदान का अधिकार होता है।
(ख) दोनों पद्धतियों में बहुमत के आधार पर ही चुनाव परिणाम घोषित
किया जाता है। परंतु पृथक निर्वाचन पद्धति में जिस संप्रदाय का उम्मीदवार
हो उसी संप्रदाय के मतदाताओं का बहुमत होना चाहिए, जबकि संयुक्त
निर्वाचन पद्धति में प्रत्याशी को जीतने के लिए उसी संप्रदाय के बहुमत की
आवश्यकता नहीं होती।
(दो) संयुक्त निर्वाचन की सामान्य निर्वाचन से तुलना -
(1) संयुक्त निर्वाचन और सामान्य निर्वाचन में घनिष्ठ समरूपता है।
सामान्य निर्वाचन-क्षेत्र में मतदाता खड़े हुए किसी भी प्रत्याशी को अपना
वोट दे सकता है।
(2) संयुक्त निर्वाचन पृथक निर्वाचन से दो बातों में भिन्न है -
(अ) सामान्य निर्वाचन-क्षेत्र एक सदस्यीय क्षेत्र हो सकता है, परंतु संयुक्त
निर्वाचन-क्षेत्र में कम से कम दो सदस्य - एक सामान्य निर्वाचन क्षेत्र की
सीट तथा दूसरा आरक्षित सीट के लिए - आवश्यक होना चाहिए।