6. एक झूठा दावा - Page 181

166 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

वह हिंदुओं के लिए आरक्षित है और हिंदू उस ढंग से संगठित हैं कि वे इस सीट के लिए आपसी टकराव को रोक सकते हैं और अपने बचे मतों का उपयोग आरक्षित सीट के लिए करते हैं, तो निश्चित है कि हिंदुओं द्वारा नामजद अस्पृश्य विजयी होगा। कारण यह है कि हिंदू, जिसके पास अपेक्षाकृत अधिक मतदान शक्ति है, उसे काफी फालतू मत मिलेंगे, जिससे उन्हें उस सीट का चुनाव करने की आवश्यकता नहीं होगी और उतने मत वे अपने द्वारा नामजद उस अस्पृश्य उम्मीदवार को दे सकते हैं जिसे वे जिताना चाहते हैं। संयुक्त निर्वाचन व्यवस्था में दो सदस्यीय निर्वाचन-क्षेत्र हैं। कांग्रेस की छत्रछाया में हिंदू इतने अधिक संगठित हैं कि उनके लिए चुनाव लड़ने की संभावना ही नहीं होती और वे अपने मतों को यूं ही नहीं गंवाते। परिणाम यह है कि इस व्यवस्था से हिंदुओं को आरक्षित सीट को जीतने में काफी सहायता मिलती है और अस्पृश्य उम्मीदवारों का विरोध करते हैं। संयुक्त निर्वाचन-क्षेत्र में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित सीटें जीत लेने में इस वजह से हिंदुओं को अत्यधिक सहायता मिलती है, क्योंकि यह आवश्यक नहीं कि अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित क्षेत्र में उनका बहुमत भी हो।

संयुक्त निर्वाचन पद्धति की इन कमजोरियों से किस तरह कांग्रेस ने 1937 के चुनावों में अत्यधिक लाभ उठाया इसका वर्णन आगे किया जाएगा। अभी मैं उस चुनाव विधि का वर्णन कर रहा हूं जिसमें अनुसूचित जातियों को प्रतिनिधित्व दिया गया और उसकी हालत कितनी खस्ता है।

III

अब हमें चुनाव विवरणों का परीक्षण करना है। इस संदर्भ में एक छोटा सा प्रश्न है। कांग्रेसियों के यह कहने का क्या यह अर्थ है कि 1937 के चुनावों से स्पष्ट है कि कांग्रेस अस्पृश्यों का प्रतिनिधित्व करती है? इसका स्पष्टीकरण आवश्यक है, क्योंकि इस प्रश्न के दो रूप हैं। इसका एक रूप यह हो सकता है कि अस्पृश्यों के लिए आरक्षित सीटों पर कांग्रेस टिकट पर खड़े हुए अस्पृश्य उम्मीदवार उन अस्पृश्य उम्मीदवारों के मुकाबले जीत गए जो कांग्रेस टिकट पर खड़े नहीं हुए थे। इसका दूसरा अर्थ यह भी हो सकता है कि जो अस्पृश्य उम्मीदवार कांग्रेस टिकट से खड़े हुए थे, उनके पक्ष में अछूतों के मत गैर-कांग्रेसी उम्मीदवारों की अपेक्षा अधिक पड़े। मैं दोनों दृष्टियों से उन विवरणों की मीमांसा करना चाहूंगा।

जो सीटें जीती गई थीं, उनके संबंध में चुनावों का परिणाम हम पहले ही प्रस्तुत कर चुके हैं। यह आवश्यक नहीं कि उन्हीं संख्याओं को यहां दुहराया जाए। यह बतलाया जा चुका है कि 151 सीटों में से कांग्रेस ने 78 सीटें जीती थीं। यह नहीं